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PF और GPF में क्या है अंतर, पीएफ के ब्याज पर टैक्स के नियम क्या GPF पर भी होंगे लागू

बजट में इस प्रावधान का जिक्र नहीं किया गया था लेकिन सीबीडीटी ने इसे बाद में स्पष्ट किया है. सीबीडीटी ने बताया कि कर्मचारी के सालाना 2.5 लाख से ज्यादा का योगदान करने पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स लगेगा

PF और GPF में क्या है अंतर, पीएफ के ब्याज पर टैक्स के नियम क्या GPF पर भी होंगे लागू
सांकेतिक तस्वीर

पीएफ यानी कि प्रोविडेंट फंड और जीपीएफ का मतलब होता है जनरल प्रोविडेंट फंड. प्रोविडेंट फंड रिटायरमेंट के साथ सेविंग स्कीम है जो कि जीपीएफ की तरह ही होती है. जीपीएफ सभी सरकारी कर्मचारियों के पीएफ से जुड़ा होता है जबकि पीएफ उन सभी कंपनियों और कर्माचरियों से संबंधित है जिसमें 20 से ज्यादा लोग काम करते हैं. इस बार के बजट में पीएफ को लेकर नियम में बदलाव किए गए हैं जिसे निवेश करने वालों के लिए झटका माना जा रहा है. टैक्स का नया नियम जीपीएफ पर भी लागू होगा.


दरअसल बजट के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया कि अब एक वित्त वर्ष के दौरान केवल 2.5 लाख रुपये तक के निवेश पर ही टैक्स छूट का फायदा मिलेगा. अगर कोई व्यक्ति इससे ज्यादा का निवेश करता है तो उसे अपनी कमाई पर टैक्स देना होगा. पीएफ पर अभी 8 परसेंट का ब्याज मिलता है और यह ब्याज अभी टैक्स के दायरे से बाहर है. इस नियम का सीधा मतलब है कि साल में 2.50 लाख रुपये के निवेश पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स नहीं लगेगा. लेकिन उससे ज्यादा निवेश किया है तो उसके रिटर्न पर अब टैक्स लगेगा.

बजट में ऐलान

जीपीएफ पर भी टैक्स का ऐसा ही प्रावधान किया गया है. बजट में इस प्रावधान का जिक्र नहीं किया गया था लेकिन सीबीडीटी ने इसे बाद में स्पष्ट किया है. सीबीडीटी ने बताया कि कर्मचारी के सालाना 2.5 लाख से ज्यादा का योगदान करने पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स लगेगा. इसलिए टैक्स के दायरे में अब सिर्फ पीएफ नहीं बल्कि जीपीएफ भी आ गया है जिसकी लिमिट 2.5 लाख रुपये रखी गई है. कोई भी कर्मचारी जिसका पीएफ या जीपीएफ 2.5 लाख रुपये से ज्यादा का है, उस पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स चुकाना होगा.

टैक्स की क्या है लिमिट

इसी तरह पीपीएफ यानी कि पब्लिक प्रोविडेंट फंड भी होता है. इसके बारे में लोगों के सवाल हैं कि क्या पीपीएफ और जीपीएफ को मिलाकर 2.5 लाख रुपये की लिमिट तय की गई है जिस पर टैक्स की छूट मिलेगी या दोनों अलग-अलग है. पीपीएफ को इस प्रावधान से बाहर रखा गया है. पीपीएफ की लिमिट 1.5 लाख रुपये है और इससे ज्यादा इसमें निवेश नहीं कर सकते, इसलिए पीएफ के 2.5 लाख वाला नियम इस पर लागू नहीं होता. 2.5 लाख रुपये का नियम पीएफ और जीपीएफ के लिए लागू होगा न कि पीपीएफ के लिए क्योंकि यह पब्लिक प्रोविडेंट फंड है और यहां कर्मचारी का कोई सवाल नहीं उठता है.

पीएफ और जीपीएफ का नियम अलग

पीएफ और जीपीएफ में कई बड़े अंतर होते हैं, जैसे कि दोनों में निवेश के तरीके भी अलग-अलग हैं. दोनों में टैक्स की देनदारी भी अलग है. जीपीएफ में डेढ़ लाख से ज्यादा के पीएफ पर टैक्स देनदारी का नियम है जबकि पीएफ में ढाई लाख का नियम है. हालांकि यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने पीएफ की रकम पर टैक्स लगाने का ऐलान किया है. इसी तरह की घोषणा 2016 के बजट में भी की गई थी लेकिन भारी विरोध के बाद सरकार ने अपने कदम पीछे खींच लिए थे. इस बार मामला दूसरा है. इस बार 2.5 लाख से ऊपर के लोगों पर टैक्स लगेगा.

छोटे निवेशकों को चिंता नहीं

सरकार ने इस कदम से साफ किया है कि छोटे निवेशकों से वह टैक्स लेने नहीं जा रही है बल्कि 2.5 लाख की लिमिट से ज्यादा पर टैक्स वसूला जाएगा. यह टैक्स मोटी सैलरी वालों के लिए होगा. वित्त मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि इससे 1 परसेंट पीएफ सब्सक्राइबर ही प्रभावित होंगे. एक आंकड़े के मुताबिक अगर आपकी बेसिक सैलरी हर महीने 173611 रुपये तक है तो आप टैक्स के नए प्रावधान से वंचित हैं. यानी कि आपके पीएफ पर कोई टैक्स नहीं लगेगा.

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