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Dr. APJ अब्दुल कलाम की जीवनी | Biography Of APJ Abdul Kalam In Hindi

 Dr. APJ अब्दुल कलाम की जीवनी | Biography of APJ Abdul Kalam in Hindi

 दोस्तों आज के लेख में हम बात करेंगे महान Dr. APJ अब्दुल कलाम की जीवनी (Biography of APJ Abdul Kalam in Hindi) के बारे में। 

 

 Biography Of APJ Abdul Kalam In Hindi

 भारत के पूर्व राष्ट्रपति के रूप में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने (Biography of APJ Abdul Kalam in Hindi) कार्य किया। एक वैज्ञानिक और इंजीनियर के तोर पर उन्होंने रक्षा अनुसंधान और विकाश संगठन और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ISRO के कई महत्वपूर्ण कार्य किए। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम एक प्रख्यात भारतीय वैज्ञानिक और भारत के एगरबह राष्ट्रपति थे। उन्होंने देश के कुछ महत्वपूर्ण संगठन जैसे कि DRDO और ISRO में कार्य किया। 

 

वर्ष 1958 के पोखरण द्वितीय परमाणु परिक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ. कलाम भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम और मिसाइल कार्यक्रम के साथ भी जुड़े थे। इसी कारन उन्हें मिसाइल मैन भी कहा जाता है। साल 2002 में कलाम भारत के राष्ट्रपति चुने गए और पाँच साल की अब्धि की उन्होंने सेवा दी। वह शिक्षण, लेखन, सार्वजनिक सेवा में लौट आए। उन्हें भारत के सर्बोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न के साथ कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

 

एपीजे अब्दुल कलाम की प्रारंभिक जीवन (Early life of APJ Abdul Kalam):

प्रारंभिक जीवन की बात करे तो एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेस्वरम में एक मुस्लिम परिवार में हुआ। उनके पिता ज़ैनुल अबिदीन एक नाविक थे और उनकी माता आशिअम्मा एक गृहणी थी। उनके परिवार की आर्थिक स्तिथि ठीक नहीं थी इसलिए उन्हें छोटी उम्र से ही काम करना पड़ा। अपने पिता की आर्थिक मदद के लिए स्कूल के बाद वह समाचार पत्र बाँटने का काम करते थे।

 

अपने स्कूल के दिनों में कलाम पढ़ाई-लिखाई में सामान्य थे पर नाइ चीज़ सिखने के लिए हमेशा तत्पर और तैयार रहते। उनके अंदर सिखने की भूख थी। वह पढ़ाई प्रर घंटो ध्यान देते। उन्होंने अपनी स्कूल की पढ़ाई रामनाथपुरम मेट्रिकुलेशन स्कूल से पूरी की। इसके बाद तिरुचिरापल्ली के सेंट जोसफ कॉलेज में दाखिला लिया, जहाँ से उन्होंने सन 1954 में भौतिक विज्ञान में स्नातक किया। उसके बाद 1955 में वह मद्रास चले गए, जहाँ से उन्होंने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की शिक्षा ली।

 

1960 में कलाम ने मद्रास इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (Madras Institute of Technology) से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। मद्रास इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से पढाई पूरी करने के बाद कलाम ने रक्षा अनुसंधान और विकाश संगठन में वैज्ञानिक के तोर पर कार्य किया। कलाम ने अपनी करियर की शुरुवात भारतीय सेना के लिए एक छोटे हेलीकाप्टर का डिज़ाइन बनाके की। DRDO में कलाम को उनके काम से संतुष्टि नहीं मिल रही थी। डॉ. कलाम पंडित जवाहरलाल नेहरू दयारा गठित इंडियन नेशनल कमिटी फॉर स्पेस रिसर्च (Indian National Committee For Space Research) के सदस्य भी थे। इस दौरान उन्हें प्रसिद्ध अंतरिक्ष वैज्ञानिक विक्रम साराभाई के साथ काम करने का अवसर मिला।

 

साल 1969 में उनका ट्रांसफर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ISRO में हुआ। यहाँ वह भारत के सॅटॅलाइट लांच वेहिकल परियोजना के निर्देशक के तोर पर नियुक्त किए गए थे। इसी परियोजना के सफलता के परिणाम स्वरुप भारत का पहला उपग्रह “रोहिणी” पृथ्वी की कक्षा में वर्ष 1980 में स्थापित किया गया।

 

ISRO में शामिल होना कलाम के करियर का सबसे अहम् मोड़ था जब उन्होंने सॅटॅलाइट लांच वेहिकल परियोजना (Satellite Launch Vehicle Project) पर कार्य आरंभ किया। तब उन्हें लगा कि वह वहीं कार्य कर रहे हैं जिससे उनका मन लगता है। 1963-64 के दौरान उन्होंने अमेरिका के अंतरिक्ष संगठन नासा की यात्रा की। परमाणु वैज्ञानिक राजा रमन्ना, जिनकी देखरेख में भारत ने पहला परमाणु परिक्षण किया, कलाम को वर्ष 1974 में पोखरण में परमाणु परीक्षण देखने के लिए भी बुलाया गया।

 

सत्तर और अस्सी की दशक में अपने कार्य और सफलताओं से डॉ. कलाम भारत में बहुत प्रसिद्ध हुए। देश के सबसे बड़े वैज्ञानिको में उनका गिना जाने लगा। उनकी ख्याति इतनी बढ़ गई कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने अपनी कैबिनेट की मंजूरी के बिना ही उन्हें कुछ गुप्त परियोजना पर कार्य करने की अनुमति दे दी। भारत सरकार ने महत्वाकांक्षी इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलेपमेंट प्रोग्राम (Integrated Guided Missile Development Program) का प्रारंभ डॉ. कलाम की देखरेख में किया। वह इस परियोजना के मुख्य अधिकारी थे। इस परियोजना ने देश को अग्नि और पृथ्वी जैसे मिसाइलें दी।

 

जुलाई 1992 से लेकर दिसंबर 1999 तक डॉ. कलाम प्रधानमंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार और रक्षा अनुसंधान और विकाश संगठन के सचिव थे। भारत ने अपना दूसरा परमाणु परीक्षण इसी दौरान किया था और उन्होंने इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आर. चिदंबरम के साथ डॉ. कलाम इस परियोजना के समन्वयक थे। इस दौरान मिले मीडिया कवरेज ने उन्हें देश का सबसे बड़ा परमाणु वैज्ञानिक बना दिया।

 

साल 1998 में डॉ. कलाम ने ह्रदय चिकित्सक सोमा राजू के साथ मिलकर एक कम कीमत का “कोरोनरी स्टेंट” का विकाश किया। इसे “कलाम-राजू स्टेंट” के नाम से जाना जाता है। भारत के राष्ट्रपति के रूप में अगर बात की जाए तो एक रक्षा वैज्ञानिक के तोर पर उनकी उपलब्धिया और प्रसिद्ध के मद्दे नजर N.D.A की गठबंधन सरकार ने उन्हें साल 2002 में राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया। उन्होंने अपनी प्रतिद्वंद्वी लक्ष्मी सहगल को भारी अंतर से पराजित किया।

 

25 जुलाई 2002 को भारत के 11 वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लिया। डॉ. कलाम देश के ऐसे तीसरे राष्ट्रपति हैं जिन्होंने राष्ट्रपति बनने से पहले ही “भारत रत्न” ले लिया था। इससे पहले डॉ. राधाकृष्णन और डॉ. ज़ाकिर हुसैन को राष्ट्रपति बनने से पहले भारत रत्न मिला था। उनके कार्यकाल के दौरान उन्हें जनता का राष्ट्रपति कहा गया। अपने कार्यकाल की समाप्ति पर उन्होंने दूसरे कार्यकाल की भी इच्छा जताई पर राजनैतिक पार्टियों में राय की कमी होने की बजह से उन्होंने विचार त्याग दिया।

 

12th राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के कार्यकाल की समाप्ति के समय एक बार फिर उनका नाम संभावित राष्ट्रपति के रूप में लाया गया। लेकिन आम सहमति नहीं होने के कारन उन्होंने अपनी उम्मीदवारी का विचार त्याग दिया। राष्ट्रपति पद से सेवा मुक्त होने के बाद डॉ. कलाम शिक्षण, लेखन, मार्गदर्शन शोध जैसे कार्यो में व्यस्त हो गए। भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद, इंदौर जैसे संस्थानों से विजिटिंग प्रोफेसर के तोर पर जुड़े रहे। इसके अलावा वह भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलोर के फेलो, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी, अन्ना यूनिवर्सिटी इन चेन्नई में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के प्रोफेसर भी रहे। उन्होंने IIT हैदराबाद, बनारस यूनिवर्सिटी और अन्ना यूनिवर्सिटी में सुचना प्रौद्योगिकी भी पढ़ाया।

 

डॉ. कलाम हमेशा से देश के युवाओं और उनके भविष्य को बेहतर बनाने के बारे में बातें करते थे। इसी संबंध में उन्होंने देश के युवाओ के लिए “What Can I Gave” पहल की शुरुवात की, जिसका उद्देश्य भ्रष्टाचार का सफाया है। देश की युवाओ में उनकी लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें 2 बार “M.T.V Youth Icon of The Year Award” के लिए मनोनीत भी किया गया। वर्ष 2011 में प्रदर्शित हुई फिल्म “I Am Kalam” उनके जीवन से प्रभावित है। शिक्षण के अलावा डॉ. कलाम ने कई पुस्तके लिखी। देश और समाज के लिए किए गए उनके कार्य के लिए डॉ. कलाम को अनेको पुरस्कार मिले। लगभग 40 विद्यालयों ने उन्हें डॉक्टट की उपाधि दी और भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण, पद्म विभूषण, भारत के सबसे बड़े नागरिक सम्मान “भारत रत्न” से आमंत्रित किया।

 

एपीजे अब्दुल कलाम की मृत्यु (Death of APJ Abdul Kalam):

27 जुलाई 2015 को भारतीय प्रबंधन संस्थान, शिल्लोंग में अध्यापन कार्य के दौरान उन्हें दिल का दोहरा पड़ा। इसके बाद करोड़ो लोगों के प्रिय और चहेते डॉ. अब्दुल कलाम परलोक सिधार गए।

 

एपीजे अब्दुल कलाम की कुछ उपलब्धियां (Some achievements of APJ Abdul Kalam):

  • 1981 में भारत सरकार पद्म भूषण
  • 1990 में भारत सरकार पद्म विभूषण
  • 1994 में  Institute of Directors विशिष्ट Fellow का सम्मान देता है
  • 1997 में भारत सरकार ने उन्हें भारत रत्न दिया
  • 1997 में ही उन्हें राष्ट्रीय एकता के लिए इंदिरा गाँधी पुरस्कार मिला
  • 1998 में उन्हें वीर सावरकर पुरस्कार भारत सरकार दयारा मिला
  • साल 2000 में उन्हें रामानुजन पुरस्कार मिला जो की चेन्नई के अल्वर रीसर्च सेंटर ने दिया
  • साल 2007 में साइंस की मानद डॉक्टरेट मिली वॉल्वेर हैम्पटन विश्यविद्यालय ब्रिटेन के दयारा
  • 2007 में उन्हें चार्ल्स द्वितीय पदक मिला रॉयल सोसाइटी ब्रिटेन के दयारा
  • 2008 में उन्हें डॉक्टर ऑफ़ इंजीनियरिंग दिया गया नानयांग प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय सिंगापुर के दयारा
  • 2009 में उन्हें कैलिफ़ोर्निया प्रौद्योगिकी संस्थान USA से अंतराष्ट्रीय करमन वॉन विंग्स पुरस्कार मिला
  • 2009 में उन्हें हुवर मैडल मिला अमेरिका के दयारा
  • 2009 में उन्हें फिरसे मानद डॉक्टरेट मिला ऑकलैंड विश्वविद्यालय के दयारा
  • 2010 में डॉक्टर ऑफ़ इंजीनियरिंग वॉटरलू विश्वविद्यालय ने दिया
  • 2011 में उन्हें आई ई ई ई (IEEE) मानद सदस्यता मिली IEEE के दयारा
  • 2012 में डॉक्टर ऑफ़ लॉ मिला साइमन फ्रेजर विश्वविद्यालय से
  • 2014 में उन्हें ब्रिटेन एडिनबर्घ विश्वविद्यालय ने डॉक्टर ऑफ़ साइंस की पुरस्कार से नवाजा

 

तो फ्रेंड्स यह थी डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जीवनी (Biography of APJ Abdul Kalam in Hindi) करता हूँ आपको उनकी यह जानकारी अच्छी लगी होगी। अगर आपको यह लेख पसंद आए तो कमेंट करके जरूर बताएं और इसे शेयर भी करें।

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