Skip to main content

नेपोलियन बोनापार्ट की जीवनी | Napoleon Bonaparte Biography In Hindi

 Napoleon Bonaparte Biography in Hindi

नेपोलियन बोनापार्ट की जीवनी – Napoleon Bonaparte Biography In Hindi

नेपोलियन बोनापार्ट एक फ्रेंच मिलिटरी लीडर था जिसका जन्म हुआ था 15 अगस्त 1769 अजाक्सिऊ में जो की एक आईलैंड है कोर्सिका में। नेपोलियन के पिता का नाम था कार्लो बोनापार्ट जो की एक लॉयर थे और उनकी माँ का नाम लेतीजीए रोमालिनो बोनापार्ट। नेपोलियन के पैदा होने से ठीक एक साल पहले फ्रांस ने कोर्सिका को इटली से एकवेर किया था। नेपोलियन की माँ इटली की थी इसी बजह से नेपोलियन की मदर लैंग्वेज और एक्सेंट इटालियन था।

 

नेपोलियन बोनापार्ट ने अपनी पढाई फ्रांस में कम्प्लीट करि और वहीं उन्होंने फ्रेंच लैंग्वेज को बोलना सीखा। नेपोलियन का इटालियन एक्सेंट होने की बजह से जब वह फ्रेंच भाषा का प्रयोग करते तो और बच्चे उनका मजाक उड़ाते। स्कूलिंग कम्प्लीट करने के बाद नेपोलियन फ्रेंच बोलने में एकदम परफेक्ट हो गए फिर उन्होंने 1785 में फ्रेंच मिलिटरी अकेडमी से अपनी ग्रेजुएशन कम्पलीट करि और फिर वहीं से शुरुवात हुई नेपोलियन की मिलिटरी करियर की।

 

पढाई कम्पलीट करने के बाद नेपोलियन मिलिटरी में पूरी तरह घुस गए। उन्हें सेकंड लियूटेनैंट ऑफ़ आर्टिलरी की पोस्ट मिली और वह बहुत ही होशियार थे। कैसे दुश्मन को ढेर किया जा सकता है और हतियारो से ही नहीं जुबान से भी यह सब उन्होंने सीखा और इसमें महारत हासिल करि। उसके बाद फ्रांस के इन्फ्लुएंसेल लीडर ने उसका हुनर दिखा और उन्हें इंटरनल आर्मी का कमांडर बना दिया। उसी बीच 9 मार्च, 1796 में नेपोलियन ने जोसेफिन से शादी कर ली लेकिन जोसेफिन से उनका कोई बच्चा नहीं हुआ तो उसके बाद नेपोलियन ने मेरी लोइस से शादी करि जिससे उन दोनों का एक बेटा हुआ।

 

नेपोलियन ने अपने निडर साहस और जंग जितनी की नीतियों से फ्रांस को उसके विदेशी दुश्मनो से हर मोड़ पर जीत दिलाई। 27 साल की उम्र में नेपोलियन को फ्रेंच आर्मी ऑफ़ इटली का कमांडो बनाया गया और उसके बाद नेपोलियन ने सार्डिनिया पर अटैक किया और उन्हें इतनी बुरी तरह फोड़ा की उन्होंने सर्रेंडर कर दिया और फिर नेपोलियन ने सार्डिनिया का बहुत सा जीता हुआ हिस्सा फ्रांस के नाम कर दिया। उसके बाद नेपोलियन और उसकी फौज ने ऑस्ट्रिया पर आक्रमण कर दिया और वहाँ जीत हासिल करि।

 

(Napoleon Bonaparte Biography in Hindi)

एक बार नेपोलियन अपनी नाव से कहीं जा रहा था लेकिन उसकी नाव भटक जाती है और वह एक टापू पर जा उतरता है। वहाँ जाकर उसने देखा कि उसके अलावा वहाँ कोई नहीं था। नेपोलियन ने उस वक्त कहा कि जहाँ तक दृष्टि जाती है अकंटक राज्य है मेरा। उसके बाद फ्रांस ने नेपोलियन को कहा कि जाओ इंग्लैंड पर अटैक करके वहाँ जीत हासिल करो लेकिन इंग्लिश चैनल को पार न करने की बजह से नेपोलियन को हार का सामना करना पड़ा। नेपोलियन ने फिर मिस्र पर अटैक करके वहाँ जीत हासिल करि और प्लान बनाया की ईस्ट एशिया में ब्रिटिश राज्य के ऊपर अटैक करेगा।

 

35, 000 हाइली स्किल सोल्जर के साथ 1798 में नेपोलियन ने अटैक करना शुरू कर दिया माल्टा, पिरामिड और नील नदी के घाटी पर अपना कब्ज़ा कर लिया। उसके बाद वह इंडिया के तरफ बढ़ने लगा लेकिन ब्रिटिश नेभी के सामने नेपोलियन को हार का सामना करना पड़ा। नेपोलियन ने उसके बाद कहा कि अगर वह इंग्लिश चैनल को किसी भी तरह पार कर सके तो वह इंग्लैंड को इस दुनिया के नक्से से मिटा देगा।

 

1799 में नेपोलियन जब मिस्र का दोहरा कर रहे थे तब उन्हें खबर मिली कि राजधानी पेरिसमें हालात कुछ ठीक नहीं है और जो गवर्नमेंट पावर में है वह कमजोर पड़ रही है। यह सुनकर नेपोलियन तुरंत पेरिस आ जाते हैं और फ्रांस में फिर खुद की सरकार बनाते हैं। फ्रांस के लोगों ने फिर नेपोलियन को एक्सेप्ट किया और फिर नेपोलियन ने खुदको फ्रांस का मुख्य यानि एम्परर (सम्राट) घोषित कर दिया।

 

जब नेपोलियन के सर पर मुकुट पहनाया जा रहा था तो जो वहाँ के पोप थे वह नेपोलियन को मुकुट पहनाने ही वाले थे कि नेपोलियन ने उन्हें रोका और बोला, तुम क्यों पहना रहे हो यह मुझे? यह सब जो मैंने हासिल किया है किसी ने फ़िराक में नहीं दिया है मुझे।” फिर पोप से नेपोलियन ने मुकुट लेकर खुदको पहनाकर फ्रांस का पहला सम्राट घोषित कर दिया। पावर में आने के बाद नेपोलियन ने अपने राज्य में शांति बनाए रखी। उसने न्यू बिज़नेस को एक्सपैंड करने के लिए टैक्सेशन (कर लगाना) में काफी छूट दी कई सड़के, हॉस्पिटल,स्कूल जैसे डेपोलेप्मेंट नेपोलियन ने जोरो-सोरो से करि।

 

(Napoleon Bonaparte Biography in Hindi)

(Napoleon Bonaparte Biography in Hindi)

उस समय नेपोलियन ने आधे से ज़्यादा युरोप पर कब्ज़ा कर रखा था। 1812 में नेपोलियन बोनापार्ट रूस पर हमला करने का निर्णय करता है और यह उसकी ज़िंदगी की सबसि बड़ी गलती साबित होने वाली थी। नेपोलियन  5, 50, 000 सैनिको की विशाल फौज के साथ फुल पावर  में रूस की और बढ़ता है लेकिन रास्ते में रूस की भयंकर सर्दी का शिकार होने की बजह से उसके कई सैनिक रास्ते में ही मारे जाते हैं।

 

रूस पहुँचने के बाद बहुत भयंकर लड़ाई होती है और आखिर में जीतता है नेपोलियन बोनापार्ट। जब वह अपनी आर्मी के साथ रूस की राजधानी मॉस्को पहुँचता है तो देखता है कि मॉस्को में बहुत भयंकर आग लगी हुई है और इस आग में खाने-पिने का सारा सामान तबाह हो जाता है। उसके बाद नेपोलियन के सैनिक भुखमरी का शिकार होने लगते हैं। खाने-पिने की कमी से बहुत दिक्कते हो रही थी ऐसे में नेपोलियन ने यह निर्णय किया कि वह फ्रांस वापस जाएँगे अपने सैनिको के साथ।

 

रूस में ठंड फिरसे शुरू हो चुकी थी और फिर उन्हें सर्दी जाने तक का वेट करना पड़ा। जब सर्दी खत्म हुई तो नेपोलियन अपने सैनिको के साथ फ्रांस की और चल पड़ते हैं  लेकिन थकावट और भुखमरी के कारन बहुत से सैनिक मारे जाते हैं। नेपोलियन जब गया था तो उसके पास 5, 50, 000 सैनिक थे लेकिन जब वह फ्रांस पहुँचा तो सिर्फ 1, 00, 000 सैनिक बचे थे। नेपोलियन ने वापस पहुँचकर देखा कि उसकी सरकार बहुत कमजोर पड़ चुकी है और उनके पडोसी देश के दुश्मन बहुत मजबूत हो चुके हैं जिन्हे वह अपनी छोटी सी आर्मी के साथ कभी नहीं हरा पता।

 

उसके बाद नेपोलियन की सरकार सौ दिन तक और काम कर पाई और फिर यूरोप के बाकि देश जिन्हे नेपोलियन ने हराकर वहाँ विजय हासिल करि थी, आपस में एक जुट होकर खड़े हो जाते हैं और फैसला करते हैं कि वह सब एक साथ हमला करेंगे नेपोलियन पर क्यूंकि उन देशो को पता था कि वह अकेले कभी भी नेपोलियन को नहीं हरा सकते और फिर 18 जून, 1815 में शुरू होता है बैटल ऑफ़ वॉटरलू (Battle of Waterloo) . एक तरफ होते हैं फ्रांस और दूसरी तरफ होते हैं यूनाइटेड किंगडम, नेदरलॅंड्स, पप्रुशिया और बाकि के देश।

 

नेपोलियन को पता था कि यह उसकी आखरी जंग होने वाली है जिसमे वह हार जाएगा लेकिन उसने हार नहीं मानी और कहा कि जब तक मेरे शरीर में जान है मैं कभी नहीं झुकूँगा और फिर होती है भयंकर लड़ाई। दोनों तरफ के हज़ारो सैनिक मारे जाते हैं और आखिर में नेपोलियन की सेना घुटने टेक देते हैं और नेपोलियन को कैद कर लिया जाता है। सेंट हेलेना टापू पर नेपोलियन को कैद करके रखा जाता है और 6 साल बाद 5 मई. 1821 में 51 साल की उम्र में नेपोलियन बोनापार्ट की मौत हो जाती है। ऐसा कहा जाता है कि नेपोलियन की मौत हुई थी उसके पेट में कैंसर होने की बजह से लेकिन कुछ लोगों का यह भी कहना है कि उसे जहर देकर मारा गया था।

 

नेपोलियन एक बहुत ही महान, होशियार और निडर योद्धा था। आज मॉडर्न देशो में कई देशो की आर्मी नेपोलियन की बनाई गई वॉर स्ट्रैटिजिस के ऊपर रिसर्च करती है और उनसे सीख लेती है। कई बड़ी-बड़ी मूवीज और बुक्स में नेपोलियन की शातिर दिमाग और आइडियाज का जिक्र हुआ है।

 

तो यह थी नेपोलियन बोनापार्ट की कहानी। उम्मीद करता हूँ आपको यह लेख “नेपोलियन बोनापार्ट की जीवनी | Napoleon Bonaparte Biography in Hindi” पसंद आई होगी अगर आपको यह लेख अच्छी लगे तो इसे शेयर भी जरूर करे अपने दोस्तों के साथ।

Comments

Popular posts from this blog

मकर संक्रांति 2021 तिथि, शुभ मुहूर्त | मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है?

मकर संक्रांति मकर संक्रांति  का भारतीय धार्मिक परम्परा में विशेष महत्व है, क्योंकि इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ कर मकर राशि में प्रवेश कर उत्तरायण में आता है। शास्त्रों के अनुसार यह सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है और इसीलिए इस दिन जप, तप, दान, स्नान का विशेष महत्व है।  मकर संक्रांति  परंपरागत रूप से 14 जनवरी या 15 जनवरी को मनाई जाती आ रही है।  मकर संक्रांति  में ‘मकर’ शब्द मकर राशि को इंगित करता है जबकि ‘संक्रांति’ का अर्थ संक्रमण अर्थात प्रवेश करना है।  मकर संक्रांति  के दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है। एक राशि को छोड़कर दूसरे में प्रवेश करने की इस विस्थापन क्रिया को संक्रांति कहते हैं। शास्त्रों के नियम के अनुसार रात में संक्रांति होने पर अगले दिन भी संक्रांति मनाई जाती है। मकर संक्रांति  के दिन सूर्य दक्षिणायन से अपनी दिशा बदलकर उत्तरायण हो जाता है अर्थात सूर्य उत्तर दिशा की ओर बढ़ने लगता है, जिससे दिन की लंबाई बढ़नी और रात की लंबाई छोटी होनी शुरू हो जाती है। भारत में इस दिन से बसंत ऋतु की शुरुआत मानी जाती है। अत:  मकर संक्रांति  को उत्तरायण के नाम से भी जाना जाता है। तम

बड़ी ख़बर। महाराजपुरा पुलिस को मिली बड़ी सफलता

ग्वालियर - बड़ी ख़बर। महाराजपुरा पुलिस को मिली बड़ी सफलता शातिर चोर पकडे 10 लाख का माल बरामद। महाराजपुरा पुलिस ने दबिश देकर पकड़ा चोरों का ग्रुप महाराजपुरा थाना प्रभारी मिर्ज़ा आसिफ बेग और उनकी टीम के द्वारा कार्यवाही की गई। महराजपुरा टीम को बड़ी सफलता हासिल हुई।  10 लाख का माल भी बरामद किया गया।  महाराजपुर टीआई मिर्जा बेग ने बताया चोरों से 6 एलसीडी 8 लैपटॉप दो होम थिएटर 6 मोबाइल फोन एक स्कूटी टेबल फैन सिलेंडर बरामद हुआ है उनसे करीब 4 चोरियों का खुलासा हुआ है करीब 10 चोरियां कि गिरोह ने हामी भरी है 

Lockdown: पूरे राज्य में फिर लॉकडाउन, सील होंगी पूरी सीमाएं

कोरोना की स्थिति गंभीर होने पर कई राज्यों में फिर लॉकडाउन की स्थिति, सभी सीमाएं भी की जा रही हैं सील...। भोपाल। मध्यप्रदेश समेत पांच राज्य एक बार फिर लॉकडाउन की तरफ बढ़ रहे हैं। मध्यप्रदेश में लगातार बढ़ते मामलों के बाद रविवार को पूरे प्रदेश में लॉकडाउन (Complete Lockdown) लगाया जा रहा है। प्रदेश में कोरोना संक्रमण (Covid 19) की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्र ने तय किया है कि अब सप्ताह में एक दिन रविवार को पूरा प्रदेश बंद रहेगा। उधर, मध्यप्रदेश के अलावा बिहार, उत्तरप्रदेश में भी लाकडाउन के आदेश जारी कर दिए गए हैं।   मध्यप्रदेश में पिछले तीन दिनों में 11 सौ से अधिक संक्रमित मरीज मिलने और जबकि 409 एक ही दिन में संक्रमित मिलने के बाद यह फैसला लिया जा रहा है इस दौरान प्रदेश की सीमाएं भी सील की जा सकती है। सिर्फ इमरजेंसी सेवाएं ही चलती रहेंगी। गृह विभाग के बाद भोपाल समेत सभी जिलों के कलेक्टर अपने-अपने जिले के लिए एडवायजरी (Advisery'guideline) जारी कर रहे हैं।   गृहमंत्री नरोत्तम मिश्र के मुताबिक इस सप्ताह में एक दिन का लाकडाउन ही