अब ये क्या है सिम-स्वैप फ्रॉड, जिसके लिए बैंक जारी कर रहे हैं अलर्ट! इस तरह खाली हो जाता है अकाउंट


हर रोज साइबर क्राइम के एक्सपर्ट नए नए तरीकों से लोगों को चंगुल में फंसा रहे हैं और उनके अकाउंट से पैसे निकाल रहे हैं. अब एक नया फ्रॉड सामने आया है, जिसका नाम सिम स्वैप फ्रॉड बताया जा रहा है

अब ये क्या है सिम-स्वैप फ्रॉड, जिसके लिए बैंक जारी कर रहे हैं अलर्ट! इस तरह खाली हो जाता है अकाउंट
साइबर क्रिमिनल एक खास तरीके से आपकी बैंक डिटेल हासिल करके अकाउंट से पैसे निकाल लेते हैं.

बैंकिंग व्यवस्था जब से ऑनलाइन हो गई है, तब से आपको काफी फायदा मिला है. आपके बैंक का 90 फीसदी काम अब घर पर ही होने लगा है और आपको बैंक जाने की जरुरत नहीं पड़ रही है. लेकिन, इस ऑनलाइन बैंकिंग व्यवस्था में फ्रॉड भी काफी संख्या में बढ़ गए हैं. हर रोज साइबर क्राइम के एक्सपर्ट नए नए तरीकों से लोगों को चंगुल में फंसा रहे हैं और उनके अकाउंट से पैसे निकाल रहे हैं. अब एक नया फ्रॉड सामने आया है, जिसका नाम सिम स्वैप फ्रॉड बताया जा रहा है.

इस फ्रॉड में साइबर क्रिमिनल एक खास तरीके से आपकी बैंक डिटेल हासिल करके अकाउंट से पैसे निकाल लेते हैं. अब आईसीआईसीआई बैंक ने इस फ्रॉड को लेकर जानकारी दी है और खाता धारकों को इसके लिए आगाह किया है. साथ ही बैंक की वेबसाइट पर इस फ्रॉड के बारे में बताया गया है और लोगों से बचने के लिए कहा गया है. ऐसे में जानते हैं कि यह फ्रॉज कैसे होता है और किस तरह से आपके अकाउंट से पैसा निकाल लिया जाता है. साथ ही यह भी जानते हैं कि आप किस तरह से सिम स्वैप फ्रॉड से बच सकते हैं…

क्या होता है सिम स्वैप एक्सचेंज?

दरअसल, ऑनलाइन बैंकिंग में सबसे अहम है कि आपका फोन. फोन पर ही आपको अलर्ट, ओटीपी, यूआरएन, सिक्योर कोड या कोई भी अकाउंट की डिटे दी जाती है. इससे आप अपने सभी ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कर सकते हैं. इसलिए, सिम स्वैप एक्सचेंज फ्रॉड में फ्रॉडस्टर आपके फोन नंबर यानी सिम का ही इस्तेमाल करते हैं. साइबर क्रिमिनल, सर्विस प्रोवाइडर की मदद से आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर की दूसरी सिम इश्यू करवा लेते हैं. यानी आपके नंबर का एक्सेस अब उनके पास पहुंच जाता है और उसके बाद उन्हें आपके फोन यूआरएन, ओटीपी मिलते रहते हैं. ऐसे में वो बैंक से जुड़ा कोई भी ट्रांजेक्शन कर लेते हैं.

कैसे होता है ये फ्रॉड

एक बार क्रिमिनल आपकी सिम का एक्सेस ले लेते हैं. इसके बाद आपके फोन के जरिए ही आपकी बैंक डिटेल्स का पता लगा लिया जाता है. इससे जितने भी वेरिफिकेशन होते हैं, वो आपके फोन के द्वारा कर दिए जाते हैं. इसके बाद जब भी कोई ट्रांजेक्शन होता है तो आपको पता नहीं चलता है. ना ही आपको कोई अलर्ट, ओटोपी मिलता है और फिर आप बैंक में शिकायत भी नहीं करते हैं. इससे आसानी से फ्रॉड कर लिया जाता है.

कैसे चलेगा पता?

इसके लिए आपको सचेत रहने की आवश्यकता है. जब भी आपकी सिम में लंबे समय तक नेटवर्क नहीं रहे, तब आपको अलर्ट रहने की आवश्यकता है. नेटवर्क ना रहे या फिर आपकी सिम काम करना बंद कर दे तो सर्विस प्रोवाइडर से जल्द से जल्द बात करें. साथ ही अपने सिम को चेक करते रहें और अपना मेल भी चेक करते रहें ताकि आपको पता चले कि कोई गलत ट्रांजेक्शन तो नहीं हुआ है.

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