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एक मिसाल ऐसी भी: जुमे की नमाज में थे किसान, हिन्दुओं ने बुझाई उनके खेतों की आग

एक मिसाल ऐसी भी: जुमे की नमाज में थे किसान, हिन्दुओं ने बुझाई उनके खेतों की आग


मध्यप्रदेश के इस शहर में हिन्दुओं ने पेश की साम्प्रदायिक सौहार्द्र की मिसाल...।

 

विदिशा। ऐसे मौके तो अक्सर आते रहते हैं जब हिन्दू-मुस्लिम के नाम पर दंगे हों आगजनी हो। लेकिन, ऐसे बिरले ही मौके होते हैं जब मुस्लिमों के खेतों या घरों में लगी आग को बुझाने हिन्दुओं का समूह अपने पूरे साधनों के साथ जा पहुंचा हो। लेकिन हमेशा की तरह यह मिसाल कायम की है सतपाड़ा सराय के हिन्दुओं ने।

 

घटना शुक्रवार को दोपहर करीब 1 बजे की है। सतपाड़ा से लगा हुआ ग्राम शेरपुर पूरी तरह मुस्लिम बाहुल्य ग्राम है। शुक्रवार होने के कारण ये सभी लोग जुमे की नमाज अदा करने मस्जिद गए हुए थे। इसी बीच, शेरपुर से करीब दो किमी दूर उनके खेतों की खड़ी फसल में अचानक आग लग गई।

 सतपाड़ा सराय के सरपंच प्रतिनिधि एड. रईस अहमद ने बताया कि आग लपटें उठने लगीं और धुंए के गुबार उठ चले। हवा ने आग को और तेज किया। यहां से सतपाड़ा करीब डेढ़ किमी दूर है। खेत में करीब 15 बीघा में शेरपुर के नफीस खां और कदीर खां की फसल जल रही थी।

 

ये खबर सतपाड़ा में पहुंची और धुएं का गुबार उठते देख बिना कुछ सोच-विचार किए सतपाड़ा के हिन्दू समाज के लोगों ने अपने-अपने ट्रेक्टर उठाए और दौड़ा दिए खेत की ओर। सतपाड़ा के ग्रामीणों का खेतों के चारों ओर मजमा लग गया, चौतरफा आग को काबू में करने के प्रयास होने लगे, अन्यथा ये आग आसपास के कई खेतों को अपनी चपेट में ले लेती।

 

 

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कोई आग और लपटों के बीच तेज ट्रेक्टर चलाकर आग दबाने की कोशिश में था तो कोई पत्तों की टहनियों से आग बुझा रहा था। जिसके जो बस में था, उससे प्रयास हो रहे थे, लेकिन नमाज में होने के कारण इस समय तक खेत मालिक और शेरपुर के लोग आ ही नहीं पाए थे। तेजी से हुए प्रयास सफल हुए और आग पर काबू पा लिया गया। आग जब लगभग काबू में आई तब शेरपुर के मुसलमानों को नमाज से लौटने पर खबर मिली और वे मौके पर पहुंचे। देखा वहां सतपाड़ा से आए लोगों ने आग बुझा ली थी।

 

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जोड़ने वाले हैं रिश्ते

सरपंच प्रतिनिधि रईस अहमद बताते हैं कि सतपाड़ा पहले भी कई बार साम्प्रदायिक सद्भाव की मिसाल (Example Of Communal Harmony) कायम कर चुका है। आज फिर उसने पूरे जिले को बताया है कि हिन्दू-मुस्लिम के रिश्ते बांटने वाले नहीं बल्कि जोड़ने और मुश्किल में एक-दूसरे की मदद के लिए भी होते हैं।

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