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4 हजार करोड़ की कीमत का है ज्योतिरादित्य सिंधिया का जय विलास पैलेस, दिवारों पर लगा है सोना चांदी, जहां चोरों ने लगाई सेंध

4 हजार करोड़ की कीमत का है ज्योतिरादित्य सिंधिया का जय विलास पैलेस, दिवारों पर लगा है सोना चांदी, जहां चोरों ने लगाई सेंध


रात को दो-तीन बजे के बीच चोर इस महल में छत के रास्ते घुसे थे, फोरेंसिक टीम ने महल के उस हिस्से से जरूरी सबूत जब्त कर लिए हैं

4 हजार करोड़ की कीमत का है ज्योतिरादित्य सिंधिया का जय विलास पैलेस, दिवारों पर लगा है सोना चांदी, जहां चोरों ने लगाई सेंध
Jai Vilas Palace

ग्वालियर (Gwalior) के महाराज के महल में चोरों ने सेंधमारी कर दी है. खरब है कि बीजेपी के राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) के मशहूर जय विलास पैलेस (jai vilas palace) के रानी महल में चोरों ने सेंधमारी की है. सिंधिया जब ग्वालियर में होते हैं तो अपने परिवार के साथ इसी महल में रहते हैं, जहां हमेशा कड़ी सुरक्षा होती है. सिंधिया राज परिवार के इस महल में हुई सेंधमारी की खबर से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है. जिले के सीनियर पुलिस अधिकारियों समेत पुलिस की टीम मौके पर हैं, और इस मामले की जांच चल रही है. सेंधमारी करने वाले चोरों को पकड़ने के लिए डॉग स्क्वॉड और फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद भी ली जा रही है.

जानकारी के मुताबिक रात को दो-तीन बजे के बीच चोर इस महल में छत के रास्ते घुसे थे, फोरेंसिक टीम ने महल के उस हिस्से से जरूरी सबूत जब्त कर लिए हैं. पुलिस को प्राथमिक जांच में अंदेशा है कि चोर किसी डॉक्यूमेंट की तलाश में रानी महल में घुसे थे. इसलिए रिकॉर्ड रूम के अंदर सारे डॉक्यूमेंट इधर-उधर बिखरे हुए मिले थे. जो पंखा और कम्प्यूटर का CPU चोर लेकर गए थे. वो पुलिस को महल की छत पर ही पड़ा मिला है.

12 लाख वर्ग फीट से भी बड़ा है पैलेस

सिंधिया खानदान का ये पुश्तैनी महल 12 लाख वर्ग फीट से भी ज्यादा बड़ा है. इस खूबसूरत महल की कीमत अब तकरीबन 4000 करोड़ रुपए  आंकि जाती है. जय विलास पैलेस को देखने के लिए देश विदेश के पर्यटक आते हैं. तो अब इस आलिशान महल की खासियत भी जान लीजिये-

महल की छत पर रखे गए थे दस हाथी

साल 1874 में श्रीमंत जयासी राव सिंधिया ने जय विलास पैलेस का निर्माण करवाया था. उस वक्त इसकी कीमत एक करोड़ रुपए आंकी गई थी. ग्वालियर का ये राजमहल तकरीबन 40 एकड़ जमीन पर फैला हुआ है. इसके निर्माण में सैकड़ों विदेशी कारीगरों ने भी काम किया था. ये महल भारत में यूरोपियन आर्किटेक्ट और डिजाइनिंग का बेहतरीन नमूना है. इसके निर्माण का काम नाइटहुड की उपाधि से सम्मानित ‘सर माइकल फिलोसे’ ने किया था. कहते हैं कि इसकी छत की मजबूती का अंदाजा लगाने के लिए महल की छत पर 10 हाथियों को 7 दिन तक रखा गया था.

पैलेस में 400 से ज्यादा कमरे

इस महल में 400 से ज्यादा कमरे हैं. और इसका दरबार हॉल काफी मशहूर है. साल 1964 में इस पैलेस के एक हिस्से में जीवाजीराव सिंधिया म्यूजियम खोला गया, पैलेस के 400 में 40 कमरे इस म्यूजियम के लिए रखे गए हैं. महल के अंदर की गैलरी, उस समय के चलन के हथियार, 19वीं सदी में इस्तेमाल होने वाली डोली-बग्घी और कई दिलचस्प चीज़ें यहां रखी गई हैं. महल की दीवारों में सोने चांदी से नक्काशी की गई है, यहां दो बड़े और शानदार झूमर लगे हैं जिनका वजन 3500 किलो है, जो पर्यटकों को काफी आकर्षित करते हैं. महल में सिंधिया शासन काल के कई अहम दस्तावेज और कलाकृतियां मौजूद है, औरंगजेब और शाहजहां की तलवार भी यहां रखी गई हैं. इसके अलावा इटली और फ्रांस की कलाकृतियां और जहाज भी यहां रखे गए हैं. इस महल की ट्रस्टी ज्योतिरादित्य सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शनी राजे सिंधिया हैं.

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