नौकरीपेशा के लिए बड़ी खबर! 1 अप्रैल से बदल जाएगा इनकम टैक्स से जुड़ा ये जरूरी नियम…नहीं मानने पर होगी सख्त कार्रवाई


अब टैक्सपेयर्स को शेयर बाजार से होने वाली कमाई के बारे में इनकम टैक्स विभाग को जानकारी देनी होगी. वित्त मंत्री ने बजट भाषण 2021 में इसकी जानकारी दी थी. टैक्स विभाग से ऐसी कोई भी जानकारी छिपाने पर मोटी पेनाल्टी भी देनी पड़ सकती है

नौकरीपेशा के लिए बड़ी खबर! 1 अप्रैल से बदल जाएगा इनकम टैक्स से जुड़ा ये जरूरी नियम...नहीं मानने पर होगी सख्त कार्रवाई
इन जानकारियों को टैक्स विभाग से छिपाने पर मोटी पेनाल्टी भी देनी पड़ सकती है.

अगर आप सैलरीड क्लास में आते हैं और शेयर बाजार ट्रेडिंग से पैसे कमाते हैं तो यह खबर आपको जरूरत पढ़नी चाहिए. दरअसल, ऐसे लोगों की डिविडेंड से होने वाली कमाई पर भी टैक्स विभाग की नजर होगी. अभी तक कई तरह की जटिलताओं में फंसने से बचने के​ लिए ऐसे लोग डिविडेंड से होने वाली कमाई के बारे में जानकारी नहीं देते थे. इस तरह की कमाई पर कैपिटल गेन्स कैलकुलेट करना और इसके लिए अलग व जटिल टैक्स फॉर्म भरना हर किसी के लिए बस की बात नहीं होती थी. लेकिन टैक्स विभाग ने इस समस्या को सुलझा दिया है.

टैक्सपेयर्स इस तरह की कमाई के बारे में टैक्स विभाग नहीं बताते थे. टैक्स विभाग को बस सैलरी से होने वाली कमाई, बैंक एफडी पर ब्याज और दूसरे सोर्सेस से होने वाली कमाई के बारे में पता चल पाता था. इस तरह के लेनदेन के बारे में फॉर्म 26AS में जानकारी दी जाती थी.

टैक्स विभाग को मिलेगी पूरी जानकारी

लेकिन 1 अप्रैल 2021 से इनकम टैक्स विभाग को शेयर ट्रेडिंग, म्यूचुअल फंड ट्रांजैक्शन, डिविडेंड इनकम से लेकर पोस्ट ऑफिस डिपॉजिट और गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों में रखे गए डिपॉजिट के बारे में भी पता चल जाएगा. इसे अब नये फॉर्मेट के फॉर्म 26AS में बताना होगा. टैक्स विभाग को इस तरह की कमाई से होने वाले मुनाफे के बारे में ब्रोकर, एसेट मैनेजमेंट कंपनियों और पोस्ट ऑफिस से सीधे जानकारी मिल जाएगी.

वित्त मंत्री ने बजट में किया था ऐलान

अभी तक इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म में टैक्सपेयर्स को अपना नाम, पैन नंबर, पता, बैंक डिटेल्स, टैक्स पेमेंट और टीडीएस आदि के बारे में जानकारी देनी होती थी. वित्त वर्ष 2021-22 के लिए बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि इनकम टैक्स फॉर्म्स में लिस्टेड सिक्योरिटी से कैपिटल गेन्स, डिविडेंड इनकम और बैंक व पोस्ट ऑफिस से मिलने वाले ब्याज की जानकारी पहले से ही भरी होगी. इससे लोगों के लिए रिटर्न फाइल करने की प्रक्रिया आसान हो जाएगी.

CBDT ने जारी कर दिया है नोटिफिकेशन

वित्त मंत्री के इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड यानी CBDT ने एक 12 मार्च को एक नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है. सीबीडीटी ने इस नोटिफिकेशन में बताया है कि कुछ तय कैटेगरी के लोगों को इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 285BA के तहत अपने फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन की जानकारी देनी होगी. इसमें लिस्टेड सिक्योरिटीज च म्यूचुअल फंड से मिलने वाले कैपिटल गेन्स, डिविडेंड इनकम और ब्याज इनकम की जानकारी शामिल है. इस कैटेगरी में आने वाले लोगों को ऐसी जानकारी देनी होगी. बीएसई और एनएसई जैसे स्टॉक एक्सचेंजों, डिपॉजिटरीज, क्लियरिंग कॉरपोरेशन, आईपीओ रजिस्ट्रार, शेयर ट्रांसफर एजेंट्स, डिविडेंड देने वाली कंपनियों, बैंकिंग कंपनियां व सहकारी बैंक आदि से ये जानकारियां टैक्स विभाग को मिलेंगी.

लग सकती है पेनाल्टी

ऐसे में अब 1 अप्रैल 2021 से एनुअल इन्फॉर्मेशन सिस्टम के व्यापक कवरेज के बाद टैक्सपेयर्स कसे इन सभी सोर्सेस से होने वाली कमाई के बारे में बताना होगा. ये जानकारियों उनके आईटीआर में पहले से ही भरी होगी. अगर कोई टैक्सपेयर्स इस तरह की जानकारी को इनकम टैक्स विभाग से छिपाता है तो उन्हें मोटी पेनाल्टी देने के लिए भी तैयार रहना होगा.

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