करोड़ों मजदूरों के लिए बड़ी खबर, औजार से लेकर बीमा और पेंशन योजना तक….सीधे खाते में आएंगे पैसे

केंद्रीय मंत्रालय ने नकदी रूप में पैसों के हस्तांतरण पर तत्काल आदेश देकर पूरी तरह से रोक लगा दिया है और श्रमिकों को किसी भी तरह की वित्तीय सहायता डीबीटी के जरिए ही दिए जाने का निर्देश दिया है
करोड़ों मजदूरों के लिए बड़ी खबर, औजार से लेकर बीमा और पेंशन योजना तक....सीधे खाते में आएंगे पैसे
मजदूरों को होगा फायदा

भवन​ और अन्य निर्माण कार्यों से जुड़े देश के करोड़ों मजदूरों के लिए बड़ी खबर है. अब सरकारी योजनाओं की राशि डीबीटी यानी डाइरेक्ट बेनिफिशियल ट्रांसफर स्कीम के तहत सीधे मजदूरों के बैंक खाते में आएगी. मजदूरों को दिए जाने वाले औजार, साइकिल वगैरह के बदले अब उन्हें खाते में ही पैसे दिए जाएंगे. वे अपनी जरूरत के मुताबिक औजार वगैरह खरीद पाएंगे.

हाल ही में जारी एक आदेश में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने राज्यों के कल्याण बोर्ड (SWB) को बीओसी श्रमिकों को वस्तुएं और घरेलू सामान वि​तरण करने की बजाय सीधे उनके बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से योजना राशि के पैसे देने का निर्देश दिया है. इस संबंध में बीते 22 मार्च को राज्यों के मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों (श्रम), श्रम आयुक्तों और राज्य बीओसी श्रमिक कल्याण बोर्ड को आदेश जारी किया गया है.

गड़बड़ी की शिकायतों पर लिया फैसला

कुछ समय पहले श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के संज्ञान में गड़बड़ी के मामले सामने आए थे. कई राज्य कल्याण बोर्ड श्रमिकों को जीवन बीमा, स्वास्थ्य बीमा, विकलांगता कवर, मातृत्व लाभ और वृद्धावस्था पेंशन जैसे जरूरी लाभ देने की जगह लालटेन, कंबल, छाता, उपकरण-किट, बर्तन, साइकिल आदि को खरीदने के लिए टेंडर जारी करते थे और उन पर खर्च कर रहे थे. चूंकि कई चरणों में खरीदी प्रक्रिया पूरी होती है, ऐसे में खरीददारी से लेकर वितरण तक में अनियमितता की आशंका बनी रहती है. इसे देखते हुए ही अब डीबीटी का फैसला लिया गया है.

कैश रुपये देने के आदेश पर रोक

केंद्रीय मंत्रालय ने नकदी रूप में पैसों के हस्तांतरण पर तत्काल आदेश देकर पूरी तरह से रोक लगा दिया है और श्रमिकों को किसी भी तरह की वित्तीय सहायता डीबीटी के जरिए ही दिए जाने का निर्देश दिया है. नया आदेश वस्तुओं या उपकरणों के वितरण पर प्रतिबंध लगाता है.

आदेश में यह भी कहा गया है कि वस्तुओं का वितरण केवल प्राकृतिक आपदाओं, महामारी, आग, व्यावसायिक खतरों या इसी तरह के अन्य संकटों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को छोड़कर और केवल राज्य सरकार की पूर्व स्वीकृति की मंजूरी पर ही दिया जा सकेगा. यह छूट केवल इसलिए दी गई है कि असाधारण परिस्थितियों में निर्माण श्रमिकों के कल्याण से कोई समझौता नहीं किया जा सकता है.

मजदूर कल्याण बोर्डों को है अधिकार

अधिनियम की धारा 22 (1) राज्यों के कल्याण बोर्ड के कार्यों को बड़े पैमाने पर निर्धारित करती है. उप-वर्गों (ए) से (जी) राज्य कल्याण बोर्ड को पेंशन, समूह बीमा योजना, श्रमिकों के बच्चों को छात्रवृत्ति, चिकित्सा खर्च, मातृत्व लाभ और गृह निर्माण के लिए कर्ज के भुगतान पर उपकर निधि को खर्च करने का अधिकार देती है.

उप-खंड (एच) बोर्ड को अपवाद के रूप में निर्धारित की गई ऐसी अन्य कल्याणकारी उपायों और सुविधाओं पर उपकर निधिखर्च करने की अनुमति देता है. यह देखा गया कि कुछ राज्यों के कल्याण बोर्ड ने अधिनियम के इस उप खंड का सहारा लेकर उपकर निधिका मनमाने ढंग से इस्तेमाल किया. इस राशि को निर्माण श्रमिकों के कल्याण के लिए उपयोग करने के बजाय बर्तन और अन्य वस्तुएं खरीदने में कर दिया गया.

सामाजिक सुरक्षा पर विशेष जोर

आदेश में जोर दिया गया है कि धारा 22 (1) (ए) से (जी) के तहत निर्धारित सामाजिक सुरक्षा कवरेज अधिनियम की धारा 22 (1) (एच) के तहत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को दिए जा रहे अन्य लाभ पहले की तरह बने रहेंगे. अधिनियम की धारा 22 (1) (ए) से (जी) में दी गई इन प्राथमिकता वाले खर्चों को पूरा करने के बाद, उपकरनिधि के किसी भी शेष राशि का उपयोग धारा 22 (1) (एच) के तहत दिए गए आदेश के अनुसार अतिरिक्त लाभ देने के लिए किया जा सकता है.

खर्च के तरीकों की निगरानी

इन योजनाओं में खर्च के तरीके पर नजर रखने के लिए मंत्रालय ने राज्यों के बोर्ड को इस तरह के मदों के विवरण पर एक वार्षिक रिटर्न प्रस्तुत करने के लिए कहा है. कानून के अनुसार सार्वजनिक और निजी निर्माण कार्यों पर राज्य सरकारों द्वारा एक फीसदी की समान दर से उपकर वसूला जाता है.

बता दें कि निर्माण श्रमिकों के कल्याण के लिए राज्यों के कल्याण बोर्ड द्वारा कोविड-19 के दौरान 2020 के लॉकडाउन के समय में अच्छी तरह से इस्तेमाल किया गया. इसके लिए श्रम मंत्रालय द्वारा 24 मार्च, 2020 को सभी राज्यों को प्रभावित बीओसी श्रमिकों को कल्याण निधि से डीबीटी के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान करने की सलाह दी गई थी.

अधिकांश राज्यों के कल्याण बोर्ड ने पंजीकृत श्रमिकों को 1000 रुपये से 6000 रुपये के बीच सहायता प्रदान की. ताजा आंकड़ों के अनुसार, राज्यों के कल्याण बोर्ड द्वारा लगभग 1.83 करोड़ निर्माण श्रमिकों को डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खातों में 5618 करोड़ रुपये वितरित किए गए.

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