जानें- कौन थे बाबा आमटे, जिनपर बना है आज का डूडल


गूगल ने समाजसेवा और कुष्ठ रोगियों के उत्थान के लिए काम करने वाले बाबा आमटे का डूडल तैयार किया है. गूगल ने एक स्लाइड शो के जरिए उनके जीवन दर्शन को समझाया है.

गूगल डूडल (बाबा आमटे)

सर्च इंजन गूगल ने डूडल के माध्यम से समाजसेवी बाबा आमटे को याद किया है. गूगल ने अपने डूडल में बाबा आमटे का एक स्लाइड शो तैयार किया है और इसमें पांच फोटो तैयार की गई है. इन पांचों तस्वीरों में बाबा आमटे की ओर से की गई समाजसेवा, उनके जीवन दर्शन और कुष्ठरोगियों के लिए किए गए काम को दिखाने की कोशिश की गई है.

बता दें कि बाबा आमटे वो शख्स थे, जिन्होंने कुष्ठ रोगियों के लिए कई आश्रम और समुदाय की स्थापना की थी. इनमें चन्द्रपुर, महाराष्ट्र स्थित आनंदवन का नाम प्रमुख है. बाबा आमटे का पूरा नाम डॉ. मुरलीधर देवीदास आमटे था और लोग उन्हें बाबा आमटे के नाम से जानते थे. आज उनकी 104वीं जयंती है, इसलिए गूगल ने अपना डूडल इस शख्सियत को समर्पित किया है.

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कुष्ठ रोगियों के लिए कई कार्य करने के साथ ही उन्होंने पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाई थी, जिसमें वन्य जीवन संरक्षण और नर्मदा बचाओ आंदोलन शामिल है. आमटे का जन्म 26 दिसम्बर 1914 को महाराष्ट्र के वर्धा जिले में हुआ था. वे एक अच्छी पृष्ठभूमि वाले परिवार से आते थे और उनका बचपन भी अमीरी में गुजरा था.

उन्होंने एम.ए.एल.एल.बी. तक की पढ़ाई की, लेकिन बाद में महात्मा गांधी और विनोबा भावे से प्रभावित बाबा आमटे ने सारे भारत का दौरा कर देश के गांवों मे अभाव में जीने वालें लोगों की असली समस्याओं को समझने की कोशिश की. साथ ही उन्होंने देश की आजादी की जंग में भी अहम भूमिका निभाई थी. बाद में अहिंसा के रास्ते पर चलते हुए वे समाजसेवा में जुट गए.

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उन्होंने साल 1985 में कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत जोड़ो आंदोलन भी चलाया था. उनका मकसद देश में एकता की भावना को बढ़ावा देना और पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरुक करना था. उन्हें कई सामाजिक कार्यों के लिए नागरिक सम्मान से सम्मानित किया गया था, जिसमें पद्मश्री शामिल है. इसके अलावा उन्हें मानवाधिकार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए युनाइटेड नेशन्स अवॉर्ड, गांधी पीस अवॉर्ड, मैग्सेसे पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था

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