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KFC And Colonel Sanders Success Story In Hindi | KFC और कर्नल सैंडर्स की सफलता की कहानी

 KFC and Colonel Sanders Success Story in Hindi

इस लेख में हम जिनकी सक्सेस स्टोरी (KFC and Colonel Sanders Success Story in Hindi) के बारे में आपको बताने जा रहे हैं वह है KFC के संस्थापक कर्नल सैंडर्स के बारे में जिन्होंने इतनी असफलता के बावजूद भी हार नहीं मानी और अंत तक लगातार कोशिश करते रहे।

 

KFC And Colonel Sanders Success Story In Hindi

दोस्तों सफलता और असफलता तो जीवन का हिस्सा होती है। कभी-कभी हम जल्दी सफल हो जाते हैं और कभी-कभी ज़्यादा वक्त लग जाता है। शुरुवाती दिक्कतों की बजह से हम में से कई लोग हार मान जाते हैं और सोच लेते हैं कि सायद वह ज़िंदगी में कुछ कर ही नहीं सकते। लेकिन आज हम बात करने जा रहे हैं एक ऐसे इंसान के बारे में जिसके जीवन के बारे में जानकर आपको इतना तो जरूर समझमें आ जाएगा कि चाहें कितनी भी सफलता आए पर जो लगा रहता है वह कभी न कभी जरूर आगे निकल जाता है। हम बात करने जा रहें हैं दुनिया के दूसरे सबसे बड़े रेस्टुरेंट KFC के फाउंडर कर्नल हरलैंड सैंडर्स के बारे में।

 


सैंडर्स का जन्म अमेरिका के इंडिआना राज्य में 1890 में हुआ था। जब वह सिर्फ 5 साल के थे तभी उनकी पिता की मृत्यु हो गई जिसके कारन उनके माँ को घर चलाने के लिए काम करना पड़ता था। ऐसे में घर का सबसे बड़ा लड़का होने के कारन घर की बाकि जिम्मेदारिया सैंडर्स के ऊपर आ गई। और सिर्फ 7 साल की उम्र से ही उन्होंने घर पर खाना बनाना शुरू कर दिया। 10 साल की उम्र से उन्होंने काम करना शुरू कर दिया और अपनी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा उन्होंने कई तरह के काम करने में गुजार दिए।

 

उन्होंने रेलवे में एक लेबर की नौकरी की मगर वहाँ से भी उन्हें झगड़ा करने की बजह से निकाल दिया गया। उन्होंने वकील बनने के लिए लॉ की पढाई की लेकिन लड़ाई-झगड़े की बजह से उन्होंने अपनी वकालत ही खराब कर ली। उसके बाद उन्होंने लाइफ इन्शुरन्स बेचने की नौकरी शुरू की मगर ठीक से काम न करने की बजह से उन्हें इस काम से भी हाथ धोना पड़ा।

 

उसके बाद उन्होंने पैसेंजर बोट की एक कंपनी खोली। कंपनी तो अच्छी चल रही थी मगर कुछ समय के बाद उन्होंने एक लैंप बनाने वाली कंपनी खोलने के लिए इसको भी बेच दिया। मगर उनसे भी अच्छी लैंप बनाने वाली कंपनी पहले से मार्किट में थी जिस बजह से फिर उनका नुकसान हो गया।

 

लगभग 40 साल की उम्र में उन्होंने एक बहुत छोटा सा रेस्टुरेंट खोला और वहाँ पर चिकेन बनाकर बेचने का काम शुरू कर दिया। समय के साथ यह बिज़नेस बढ़ता चला गया और उन्होंने 6 टेबल से बढ़ते-बढ़ते 142 टेबल्स कर लिए। सड़क के किनारे के एक जगह खरीदकर उन्होंने उसका नाम सैंडर्स कोर्ट एंड कैफ़े रख दिया।

 

1940 तक उन्होंने चिकेन में डालने के लिए 11 पौधों और मसालों को मिलाकर एक खास मसाला तैयार किया। हालाँकि उन्होंने कभी भी यह खुलासा नहीं किया कि उसमें उन्होंने क्या डाला है पर इतना जरूर बताया कि जो भी चीज इसमें पड़ी है वह सभी लोग अपने किचन में इस्तेमाल करते हैं। इसके इस्तेमाल से उनका बिज़नेस और भी चमकने लगा।

 

मगर 1955 में एक सड़क बनाने के लिए सरकार ने उनकी वह जमीन ले ली और उन्हें अपना रेस्टुरेंट बंद करना पड़ा। इसलिए उन्होंने सब कुछ बेच दिया और चिकेन की रेसिपी को फ्रैंचाइज़ करने का फैसला किया। फ्रैंचाइज़ का मतलब यह होता है कि लोग आपके बनाई हुई किसी खास चीज को इस्तेमाल करेंगे और आपको उसकी बिक्री पर कमिशन मिलेगा।

 

उन्होंने एकबार बताया था कि इसके लिए भी उन्हें बहुत परेशानी उठानी पड़ी। वह बहुत सारी रेस्टुरेंट में जाकर फ्रैंचाइज़ के लिए बात करते थे। 1009 बार लोगों ने उनको ना बोल दिया। उसके बाद कहीं जाकर उन्हें अपना पहला फ्रैंचाइज़ पार्टनर मिला। इस रेसिपी से बनने वाले चिकेन का नाम अमेरिका के एक केंटुकी के नाम पर केंटुकी फ्राइड चिकेन रखा गया।

 

उन्होंने पेपर के बकेट में अपना खास खाना कस्टमर को देने का सिस्टम शुरू कर दिया जो कंपनी की एक खासियत बन गई और आज भी चल रही है। यह बिज़नेस बहुत तेज चलने लगा और 1963 तक कंपनी के 600 रेस्टुरेंट हो गए और केंटुकी फ्राइड चिकेन अमेरिका के सबसे बड़ी फ़ूड कंपनी बन गई।

 

1964 में सैंडर्स को लगा कि सायद इस उम्र में वह कंपनी को और संभाल नहीं पाएंगे इसलिए उन्होंने कंपनी उस समय 2 मिलियन डॉलर में बेच दी जो की आज के लगभग 15 मिलियन डॉलर्स होंगे और यह शर्त रखे कि उन्हें पूरी जिंदगी सैलेरी मिलेगी, कंपनी के ट्रेडमार्क वही रहेंगे और कंपनी के प्रोडक्ट्स के क्वालिटी को भी वही कण्ट्रोल करेंगे। इसलिए आज भी हम KFC के नाम के साथ एक बूढ़े आदमी की फोटो देखते हैं जो उन्ही की है।

 

इसके बाद कंपनी की ग्रोथ और बढ़ गई और 1970 तक 48 देशो में यह KFC के 3, 000 रेस्टुरेंट खुल गए। 1980 में जब सैंडर्स की मृत्यु हुई तब तक KFC के 6, 000 रेस्टुरेंट खुल चुके थे और सालाना लगभग 2 बिलियन डॉलर की बिक्री हो रही थी। KFC को कई ग्रुप्स ने ख़रीदा और बेचा। 1986 में रेनॉल्ड्स ने उसे पेप्सिको को 850 मिलियन डॉलर्स में बेच दिया। तब से KFC को पेप्सिको ही चला रही हैं।

 

1991 में कंपनी का नाम केंटकी फ्राइड चिकेन से बदलकर KFC रख दिया गया क्यूंकि उसमें फ्राइड शब्द का इस्तेमाल  जिसे लोग उनहेल्थी मानते हैं। 2015 में कंपनी के 123 देशो में 20, 000 से भी ज़्यादा रेस्टुरेंट खुल चुके हैं। उन्होंने एक बार कहा था कि हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि हर असफलता कुछ बेहतर होने का एक प्रारंभिक प्रयास होती है।

 

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