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Google And Larry Page Success Story In Hindi | लैरी पेज और गूगल की सफलता की कहानी

Google And Larry Page Success Story In Hindi | लैरी पेज और गूगल की सफलता की कहानी

 Google Success Story in Hindi

Google Success Story In Hindi

दोस्तों आज मैं बात करने जा रहा हूँ इंटरनेट के दुनिया में राज करने वाले गूगल कंपनी (Google Company) के को-फाउंडर लैरी पेज के बारे में, जिन्होंने सेर्गी ब्रिन के साथ मिलकर Google जैसा Search Engine बनाया और इस खोज के जरिए उन्होंने हमारी ज़िंदगी कितनी आसान कर दी।

 

गूगल आज के ज़माने में दुनिया के सबसे सफल कंपनियों में से एक है और यही बजह है की लैरी पेज भी सबसे सफल व्यवसायी के गिनती में गिने जाते हैं। तो चलिए बिना किसी देरी के लैरी पेज और गूगल की सफलता की कहानी को शुरू करते हैं।



लैरी पेज का जन्म 26 March, 1973 को अमेरिका के मिशिगन में हुआ था। उनके पिता का नाम कार्ल विक्टर और माँ का नाम ग्लोरिया था और दोनों ही वहीं के स्टेट यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस के प्रोफेसर थे। लैरी बताते हैं कि उनके घर पर आमतौर पर कंप्यूटर साइंस से सम्बंधित मैगजीन्स और गैजेट्स बिखरे हुए रहते थे और इसी एनवायरनमेंट में पले-बड़े होने की बजह से लैरी को बचपन से ही कंप्यूटर में काफी लगाव हो गई।

 

उन्होंने बहुत छोटी उम्र से ही चीज़ो को खोलकर समझना शुरू कर दिया। वह जानना चाहते थे कि आखिर कोई भी चीज़ काम कैसे करती है। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि मैंने बहुत ही कम उम्र से यह महसूस कर लिया था कि मैं चीज़ो का अविष्कार करना चाहता हूँ और जब वह 12 साल के आसपास थे तभी उन्होंने सोच लिया कि वह एक बिज़नेस मैन बनेंगे। जिसके बाद से उन्हें बिज़नेस वर्ड्स के बातो को जानने की दिलचस्पी होने लगी।

 

लैरी पेज की शुरुवात  पढाई ओकेमोस मोंटेसरी स्कूल (Okemos Montessori School) में हुआ। इसके बाद उन्होंने १९७९ में ईस्ट लैंसिंग हाई चूल (East Lancing High School) से अपनी ग्रेजुएशन पूरी की और फिर आगे चलकर वह स्टैंडफोर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन कम्पलीट करने के बाद वहीं से PHD करने लगे जहां उनकी मुलाक़ात हुई Apple के को-फाउंडर सेर्गी ब्रिन से।

 

PhD में दोनों ने अपना रिसर्च टॉपिक WORLD WIDE WEB को चुना और फिर वह ऐसे अलकोहरिदम के  खोज में लग गए जैसे सभी  को एक साथ किया जा सके और उनके पॉपुलैरिटी के आधार पर उनके पेजेज को रैंकिंग दी जा सके। अगले 4 साल तक दिन-रात एक कर उन्होंने जबरजस्त रिसर्च की और आखिकार सितंबर 1996 में वह ऐसे अलकोहरिदम को खोजने में सफल हो गए।


Google का नाम गणित के शव्द Googol से लिया गया है, जिसका मतलब होता है एक अंक के आगे सौ शुन्य। पहली बार जिस Google को लांच किया गया था वह स्टैंडफोर्ड यूनिवर्सिटी के वेबसाइट पर अभी भी उपलब्ध है। आगे चलकर अपने परिवार, दोस्तों और इन्वेस्टर से दस लाख डॉलर का कर्ज लेकर लैरी और ब्रिन ने 1998 में Google, Inc. कंपनी की स्थापना की और अपनेयूनिक कांसेप्ट और अलकोहरिदम की बजह से Google बहुत ही जल्द दुनिया का सबसे लोकप्रिय Search Engine बन गया।

 

बस यहाँ से लैरी और उनके साथ ब्रिन ने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा और फिर अगले कुछ ही सालो के बाद 2004 में Google को शेयर मार्किट में उतारा गया जहाँ पर लोगों ने जमकर इन्वेस्ट किया। इस तरह से धीरे-धीरे Google इंटरनेट की दुनिया में सबसे बड़ी कंपनी बन गई और Google को बनाने वाले लैरी पेज और सेर्गी ब्रिन सबसे यंगेस्ट बीलिओनेर बन गए।

 

14 November, 2006 को Google ने इस समय के सबसे लोकप्रिय और सबसे बड़ी वीडियो लाइब्रेरी YouTube का अधिग्रहण किया। इसके अलावा 30 April, 2009 को Google दयारा ही पहला एंड्राइड ऑपरेटिंग सिस्टम लांच किया गया जो इस समय दुनिया भर के अरबो-खरबो मोबाइल फ़ोन्स पर छाया हुआ है।

 

Google Search Engine और YouTube के अलावा भी Gmail, Google Translate, Google+, Google Chrome और Google Map जैसे 50 से भी ज़्यादा प्रोडक्ट्स Google के पास उपलब्ध है। Google का हेड ऑफिस कैलिफोर्निया के सिलिकन वैली में हैं। पूरी दुनिया में अगर सबसे धनी लोगों के बारे में बात करें तो लैरी पेज 12 नंबर पर आते हैं।


अंत में मैं इस लेख में यही कहना चाहूंगा कि लैरी पेज और सेर्गी ब्रेन के दिन-रात के मेहनत का ही फल है कि आज दुनिया भर में ज़्यादातर लोग इंटरनेट की शरुवात Google से ही करते हैं। इंटरनेट की क्षेत्र में उनके योगदानों को कभी नहीं भुलाया जा सकता।

 

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