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ईद की नमाज़ का तरीका घर पर पढ़ने का चास्त की नमाज़ का वक़्त – Chast Ki Namaz Ka Waqt

ईद की नमाज़ का तरीका घर पर पढ़ने का चास्त की नमाज़ का वक़्त – Chast Ki Namaz Ka Waqt


जब सूरज तुलूअ होता है फिर 20 मिनट बाद इशराक का वक़्त शुरू होता है . यानी सूरज निकलने के 20 मिनट बाद जब आप सूरज को देखे तो आप आराम से उसको देख पाए या नजरे मिला पाए ! यही वक़्त इशराक का वक़्त होता है ! इसी वक़्त में इशराक की नमाज़ पढ़ी जाती है !

फिर उसके थोड़ी देर बाद जब सूरज अपनी पूरी रवानी पे आजाये ( सूरज में बहुत तेजी आजाये ) उस वक़्त आप सूरज से नजरे नहीं मिला पाएंगे ! मतलब आप सूरज को खुली नज़रो से देखने में कठिनाई महसूस करेंगे ! बस यही वक़्त चास्त का वक़्त होता है ! लिहाज़ा इसी वक़्त चास्त की नमाज़ पढ़नी चाहिए !

इशराक और चास्त का वक़्त ज़वाल के वक़्त से पहले तक का होता है !

यानी की जवाल से पहले पहले आप इशराक की नमाज़ भी पढ़ सकते है . और चास्त की नमाज़ भी पढ़ सकते हो !

चास्त की नमाज़ का तरीका Chast Ki Namaz ka tarika

आप इस नमाज़ को 2×2 की नियत से भी पढ़ सकते हो.  और 4×4 की नियत से भी पढ़ सकते हो। और 2 से लेकर 12 रकअत तक जितनी मर्जी चाहे पढ़ सकते हो।  और कम से कम 2 और ज्यादा से ज्यादा 12 पढ़ सकते हो।

चास्त की नमाज़ की नियत – Chast Ki Namaz Ki Niyat

नियत की मैंने 2 रकअत या 4 रकअत नमाज़ चास्त की वास्ते अल्लाह तआला के मुँह मेरा काबे शरीफ की तरफ अल्लाहुअक्बर !

चास्त की नमाज़ का तरीका Chast Ki Namaz ka tarika

अल्लाहुअक्बर कहते हुए हाथ बाँध लेना है . फिर सना उसके बाद सूरह फातिहा और क़ुरआन शरीफ की कोई भी सूरत पढ़ेंगे जो आपको याद हो ! बाकी नमाज़ और नमाज़ की तरह ही पढ़ेंगे !
अगर आपने चार रकअत की नियत की है तो दो रकअत के बाद अत्तहिय्यात के बाद जब तीसरी रकअत खड़े होकर शुरू करे . तो सबसे पहले सना पढ़े ! फिर बाकि बची हुई नमाज़ और नमाज़ की तरह ही पढ़े !
बेहतर यही है की 2x 2  रकअत की नियत से नमाज़ पढ़े ताकि कोई भी कन्फूज़न ना हो।
सना के अलफ़ाज़ – Sanaa Ke Alfaz

सुब्हानल्लाहि वल हम्दु लिल्लाहि वला इलाहा इल्लल्लाहु  वल्लाहु अकबर 

तम्बीह: अगर चार रकअत की नियत की हो तो ! – नमाज़ नफ़्ल में हर दो रकअत पर क़अदा करना फ़र्ज़ है ! इस लिये जब क़अदे में बैठें

तो अत्तहिय्यात के साथ दुरूद शरीफ़ और दुआ पढे !

फिर तीसरी रकअत के लिये खडे हों

तो पहले सना पढे फिर सूरए फातिहा से शुरू करें, इस बात का हमेशा खयाल रखें ! आम तौर पर लोग इससे गाफिल हैं !

सरकारे दो आलम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया तीन वक़्त मकरूह वक़्त है जिस वक़्त कोई नमाज़ नहीं पढ़ी जाती

1.-तुलूअ आफ़ताब ( सूरज की  20 मिनट तक )

2.-ग़ुरूब आफ़ताब और

3.-जवाल

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