मध्य प्रदेश: सरकारी सिस्टम में युवाओं की कमी, साढ़े 5 लाख में 18-21 साल के सिर्फ 3,504 कर्मचारी


सरकारी पदों पर भर्तियां न होना भी सिस्टम के धीरे चलने का कारण हैं. प्रदेश के अलग-अलग विभागों को मिलाकर करीब 80 हजार पद खाली हैं

मध्य प्रदेश: सरकारी सिस्टम में युवाओं की कमी, साढ़े 5 लाख में 18-21 साल के सिर्फ 3,504 कर्मचारी
सीएम शिवराज सिंह चौहान (फाइल फोटो)

भारत के सरकारी सिस्टम को कछुए की चाल से चलने वाला माना जाता है. सिस्टम के धीरे चलने के पीछे उसमें व्याप्त भ्रष्टाचार को वजह माना जाता है. लेकिन मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में भ्रष्टाचार और कर्मचारियों के काम करने के तरीके के अलावा भी वजह कई हैं. दरअसल आज के समय में जब दुनिया डिजिटल हो रही है और काम तेजी से करने की जरूरत है तब मध्य प्रदेश के सरकारी विभागों में उम्रदराज कर्मचारियों का कब्जा है. इसके साथ ही खाली पदों की भर्ती न करना भी सिस्टम के सुस्ती की वजह है.

उम्रदराज कर्मचारियों का अनुपात मध्य प्रदेश में ज्यादा है. प्रदेश में करीब 5 लाख 55 हजार कर्मचारी ऐसे हैं जो रेगुलर हैं. साल 2021 में करीब 21 हजार सरकारी कर्मचारी सेवानिवृत्त होंगे.

ये है कर्मचारियों की उम्र का अनुपात

सरकारी विभाग में काम कराने के लिए ज्यादातर युवा जाते हैं, लेकिन उनका काम करने वाले लोग उम्रदराज है. न्यूज 18 पर चली खबर के मुताबिक 18-21 साल की उम्र के सिर्फ 3,504 कर्मचारी हैं. 22-25 की उम्र के 20 हजार 54 कर्मचारी हैं. 47 हजार 407 कर्मचारी ऐसे हैं जिनकी उम्र 26 से 30 साल के बीच है, वहीं 64 हजार कर्मचारी 31-35 की उम्र के हैं. 71 हजरा 667 कर्मचारी 36 से 40 की उम्र के हैं. 80 हजार 958 कर्मचारी 41 से 45 की उम्र और 82 हजरा 041 कर्मचारी 46 से 50 की उम्र के हैं. 87 हजार कर्मचारियों की उम्र 51-55 साल के बीच है. 56 से 60 साल के बीच 75,592 कर्मचारी हैं. 60 साल से ज्यादा की उम्र के 22,544 कर्मचारी अभी सेवा में हैं.

सरकारी पद खाली

सरकारी पदों पर भर्तियां न होना भी सिस्टम के धीरे चलने का कारण हैं. प्रदेश में 40 हजार पद शिक्षकों के खाली हैं. बैकलॉग के लगभग 19,000 जगह पर भर्तियां होनी हैं. लेखपाल समेत अन्य विभागों में करीब 80 हजार से ज्यादा पद खाली हैं. बीजेपी प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने कहते हैं कि एक साल में करीब 10 हजार खाली सरकारी पदों पर भर्ती हुई हैं. वहीं, कांग्रेस ने प्रवक्ता भूपेंद्र सिंह का कहना है कि शिवराज सरकार युवाओं को सरकारी नौकरी देने पर ध्यान नहीं दे रही है. सरकार संविदा पर भर्तियां करके काम चलाना चाहती हैं.

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