10-15 परसेंट महंगे हो जाएंगे रेडिमेड कपड़े, दिवाली तक राहत के आसार नहीं, जानिए वजह


सर्दी के सीजन में ऊनी कपड़ों की मांग में सुधार से उद्योग को राहत मिली है. हालांकि पिछले साल के मुकाबले बिक्री करीब 40 फीसद कम रही और इसकी मुख्य वजह शादियों और पार्टियों के परिधानों की मांग नदारद रहना है

10-15 परसेंट महंगे हो जाएंगे रेडिमेड कपड़े, दिवाली तक राहत के आसार नहीं, जानिए वजह
दिल्ली में गांधीनगर गारमेंट मार्केट

अब आपको पहले की तुलना में कपड़ों की ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है. टेक्सटाइल, कलर केमिकल और यार्न की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है जिससे कपड़ों के दाम पहले से बढ़ सकते हैं. यार्न की कीमत में पहले की तुलना में 35 परसेंट की बढ़ोतरी हुई है. कच्चे माल की महंगाई बढ़ने से गारमेंट उद्योग पर भी बड़ा असर देखा जा सकता है.

एक रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे माल के दाम बढ़ने के कारण गारमेंट की कीमतों में 10-15 परसेंट की बढ़ोतरी होगी. ऐसे में लोगों को अब कपड़ों की महंगाई से रूबरू होना पड़ेगा. पिछले साल के मुकाबले यार्न के दाम 35 परसेंट तक बढ़ गए हैं. इससे रेडिमेड कपड़ों की कीमतों पर बड़ा असर होगा और ये महंगे हो जाएंगे. इसकी बड़ी वजह यह बताई जा रही है कि मार्च से अगस्त तक कोरोना के चलते कामकाज बिल्कुल ठप था. सितंबर के बाद इसकी मांग बढ़ी और अब धीरे-धीरे यार्न के बिजनेस में तेजी देखी जा रही है

यार्न-कलर के दाम बढ़े

पिछले साल फरवरी में यार्न की कीमत 195-200 रुपये प्रति किलो थी जो अब 260 रुपये पर पहुंच गई है. घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में यार्न की बहुत मांग बढ़ रही है जिससे इसके दाम में बढ़ोतरी देखी जा रही है. अब ग्रामीण इलाकों से भी इसकी मांग में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है. अक्टूबर महीने से इसकी मांग और तेज हुई है जिससे कीमतों में अच्छी बढ़ोतरी देखी जा रही है.

इस साल न सिर्फ यार्न बल्कि कपड़ों की प्रोसेसिंग में लगने वाले कलर और केमिकल के दाम भी उछल गए हैं. इनके दाम पहले के मुकाबले 15 परसेंट तक बढ़ गए हैं. इसके चलते अब आपको कपड़ों के लिए 10-15 परसेंट ज्यादा दाम चुकाने पड़ सकते हैं. कपड़ा फैक्ट्रियों में अभी गर्मी के कपड़े बन रहे हैं और आने वाले तीन महीनों में फेस्टिवल सीजन यानी कि दिवाली की तैयारी शुरू हो जाएगी. इस त्योहारी सीजन के लिए भी कपड़े बनाए जाने लगेंगे. अभी के ट्रेंड को देखते हुए दिवाली के आसपास कपड़ों की कीमतें बढ़ जाने की संभावना है.

दिवाली बाद सस्ते होंगे कपड़े

कारोबारियों का कहना है कि जैसे-जैसे बाजार में मांग बढ़ेगी और माल की सप्लाई होगी, वैसे-वैसे कीमतें गिरेंगी. लेकिन यह दिवाली के बाद ही होगा. दिवाली से पहले लोगों को कपड़ों की खरीद पर ज्यादा कीमत चुकाना पड़ेगा. कारोबारी बताते हैं कि शादी के सीजन में कपड़ों की बिक्री तेजी पकड़ती है जो अभी चल रहा है. लेकिन कोरोना के चलते शादियां कम हो रही हैं जिससे मांग में पहले से सुस्ती देखी जा रही है.

पिछले साल के मुकाबले देखें तो अभी रेडिमेड गारमेंट की मांग 50-60 परसेंट कम है. उद्योग संगठन की मानें तो भारत में कपड़ा उद्योग कृषि के बाद सबसे ज्यादा रोजगार देने वाला क्षेत्र है, लेकिन कोरोना काल में उद्योग का हाल खस्ता होने से मजदूरों और कारीगरों को भी बेकारी का सामना करना पड़ा. हालांकि उद्योग में रिकवरी आने से मजदूरों और कारीगरों को भी अब रोजगार के साधन मिलने लगे हैं.

सर्दी में ऊनी कपड़ों की मांग बढ़ी

सर्दी के सीजन में ऊनी कपड़ों की मांग में सुधार से उद्योग को राहत मिली है. हालांकि पिछले साल के मुकाबले बिक्री करीब 40 फीसद कम रही और इसकी मुख्य वजह शादियों और पार्टियों के परिधानों की मांग नदारद रहना है. एशिया में रेडीमेड गारमेंट के सबसे बड़े बाजारों में शुमार दिल्ली के गांधीनगर मार्केट में पिछले साल की तरह चहल-पहल नहीं दिखी.

बीते त्योहारी सीजन में दिवाली के मौके पर रेडीमेड गारमेंट की बिक्री जोर पकड़ने से बाजार में रौनक रही थी. उत्तर भारत में गारमेंट और होजरी की प्रमुख औद्योगिक नगरी लुधियाना में त्योहारी सीजन के दौरान पंजाब में किसानों के आंदोलन के चलते रेल परिवहन बंद रहने के कारण कारोबारियों को ऑर्डर समय पर पूरा करने में कठिनाई आई. मगर जनवरी में ऊनी कपड़ों की मांग निकलने से बहुत हद तक राहत मिली. कारोबारी बताते हैं कि पिछले साल के मुकाबले बिक्री करीब 40 फीसद कम रही.

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