मध्यप्रदेश उप चुनाव:कांग्रेस प्रत्याशियों ने डमी फॉर्म भरने पार्टी नेता और समर्थकों के बजाय पत्नी-बच्चों पर जताया भरोसा


मध्यप्रदेश उपचुनाव में भी नोटा पर अच्छा खासा मतदान हो सकता है। इससे पहले 2019 चुनाव में भी मतदाताओं ने नोटा पर जमकर वोट किया था।
  • 5 सीटों पर 80 में से 9 फार्म निरस्त, इनमें से 3 कांग्रेस के डमी कैंडिडेट, मैदान में 71 प्रत्याशी
  • इधर..शहर में नोटा के समर्थन में बाजार में बांटे गए पर्चे-नोटा दबाओ, विरोध दर्ज कराओ, देश बचाओ

जिले की पांच विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए 16 अक्टूबर तक 80 लोगों ने अपने नामांकन दाखिल किए थे। शनिवार को जब इन नामांकन फॉर्म की स्क्रूटनी की गई तो उसमें से 9 नामांकन पत्र अलग-अलग त्रुटियों के चलते खारिज हो गए। जिसमें नामांकन जौरा से कांग्रेस प्रत्याशी पंकज उपाध्याय, सुमावली से अजब सिंह कुशवाह व दिमनी से रविंद्र तोमर के डमी प्रत्याशी के नामांकन शामिल हैं।

यहां बता दें कि जौरा से कांग्रेस प्रत्याशी पंकज ने अपने डमी कैंडिडेट के रूप में अपने भाई रवि उपाध्याय व दिमनी से रविंद्र भिड़ौसा ने अपने भाई भूपेंद्र तोमर का नामांकन राष्ट्रीय दल कांग्रेस के नाम पर दाखिल कराया था। इन दोनों प्रत्याशियों द्वारा डमी कैंडिडेट के रूप में अपनी ही पार्टी के पदाधिकारियों के बजाय परिजन को चुना। हालांकि सुमावली से अजब सिंह कुशवाह ने जरूर डमी कैंडिडेट के रूप में अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ता कुलदीप सिकरवार को नामांकन भरवाया था, जो आज खारिज हो गया।

बाजार में नोटा के समर्थन में व्यापारियों-दुकानदारों में बंटवाए पर्चे
उपचुनाव में जहां भाजपा-कांग्रेस, बसपा सहित सभी राजनैतिक दल लोगों को घर-घर जाकर अपने समर्थन में वोट डालने के लिए मान-मनौव्वल कर रहे हैं। इधर उपचुनाव से क्षुब्ध लोग भी मैदान में कूंद पड़े हैं। शनिवार को शहर के मुख्य बाजार, एमएस रोड के किनारे स्थित दुकानेां, प्रतिष्ठानों पर नोटा के समर्थन में पर्चे छपवाकर बंटवाए गए।

इन पर्चों में व्यापारियों से कहा गया है कि एक बार वोट देने के बाद आपके पास विधायक/प्रत्याशी बदलने का विकल्प नहीं है लेकिन चयनित विधायकों के पास पार्टी बदलने का विकल्प है। लेकिन हमारे पास एक बेहतर विकल्प है नोटा। पर्चे में अपील की गई है कि नोटा दबाएं, विरोध दर्ज कराएं, देश बचाएं। अब यह पर्चे किसने बंटवाए स्पष्ट नहीं हो सका।

छोटे व निर्दलीय को 10 प्रस्ताव जरूरी
चुनाव के दौरान राष्ट्रीय पार्टी से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार को नामांकन फॉर्म जमा करते समय एक प्रस्ताव के हस्ताक्षर होना जरूरी हैं। अगर कोई राष्ट्रीय पार्टी से नामांकन भरने वाला कैंडिडेट संबंधित पार्टी का मेंडेड नामांकन के साथ जमा नहीं कर सकता तो उसे स्वत: ही निर्दलीय मान लिया जाता है।

जबकि क्षेत्रीय राजनैतिक दल व निर्दलीय के नामांकन पर 10 प्रस्तावकों के हस्ताक्षर होना जरूरी हैं, इसलिए शनिवार को 9 नामांकन फॉर्म खारिज हुए। 80 में से 9 प्रत्याशियों के नामांकन पत्र खारिज होने के बाद सोमवार 19 अक्टूबर को शाम 3 बजे तक तक प्रत्याशी अपने-अपने नामांकन फॉर्म वापस खींच सकते हैं। इसके बाद शेष बचे हुए प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह आवंटित किए जाएंगे।

....तो जौरा, अंबाह मुरैना में पोलिंग पर लगानी होंगी 2-2 ईवीएम-वीवीपेट
9 नामांकन खारिज होने के बाद जौरा विधानसभा में 16, मुरैना विधानसभा में 17 तथा अंबाह विधानसभा में 16 प्रत्याशी मैदान में शेष रह गए हैं। अगर सोमवार को नामांकन फॉर्म इन तीनों विधानसभाओं में कुछ अन्य लोगों ने नामांकन फॉर्म वापस नहीं लिए तो इन तीनों ही जगह के पोलिंग पर एक से अधिक यानि 2-2 ईवीएम व वीवीपेट मशीन लगानी पड़ेगी। यहां बता दें कि एक ईवीएम में 16 स्लॉट होते हैं, जिनमें से एक नोटा के लिए रिजर्व रहता है। ऐसे में एक ईवीएम में 15 प्रत्याशी के नाम पर मतदाता वोट डाल सकता है।

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