मुरैना विधानसभा:त्रिकोणीय मुकाबले में जाति ही जीत का फैक्टर, कांग्रेस और भाजपा दोनों ने गुर्जर उम्मीदवारों पर दांव खेला


मुरैना सीट से भाजपा उम्मीदवार रघुराज सिंह कंषाना (बाएं) और कांग्रेस प्रत्याशी राकेश मावई (दाएं)
  • मावई को मिला सिंधिया के साथ न जाने का इनाम
  • बसपा से लड़ रहे रामप्रकाश राजौरिया की नजर ब्राह्मण वोटों पर

केंद्रीय मंत्री नरेंद्रसिंह तोमर के लाेकसभा क्षेत्र की प्रमुख विधानसभा सीट मुरैना में फिलहाल त्रिकोणीय संघर्ष नजर आ रहा है। यहां सबसे अधिक गुर्जर मतदाता हैं। इसलिए कांग्रेस और भाजपा दोनों ने गुर्जर उम्मीदवारों पर दांव खेला है।

भाजपा प्रत्याशी रघुराज कंसाना का यह दूसरा चुनाव है। पिछले चुनाव में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी की हैसियत से भाजपा प्रत्याशी पूर्व मंत्री रुस्तम सिंह को हराया था। रघुराज के भाजपा में जाने के बाद कांग्रेस ने सिंधिया के कट्‌टर समर्थक रहे राकेश मावई को सिंधिया के साथ न जाने के इनाम स्वरूप प्रत्याशी बनाया है। उनका पहला चुनाव है। बसपा से लड़ रहे रामप्रकाश राजौरिया की नजर ब्राह्मण वोटों पर है।

चोट खाए, फिर लौट आए

राजौरिया को पिछले चुनाव में बसपा ने टिकट का आश्वासन दिया था। राजौरिया ने प्रचार भी शुरू कर दिया था, लेकिन अंतिम समय में बलवीर दंडोतिया को टिकट दे दिया था। नाराज राजौरिया आप से चुनाव लड़े व बुरी तरह हार गए। बाद में वे भाजपाई हो गए। जैसे ही यह तय हुआ कि उपचुनाव में कांग्रेस से भाजपा में आए लोगों को ही टिकट मिलेगा तो राजौरिया वापस बसपा में चले गए।

गुर्जर की काट गुर्जर ही
यहां से परंपरागत रूप से चुनाव लड़ते आए पूर्व मंत्री रुस्तम सिंह ने खुद के साथ ही बेटे का भी नाम आगे बढ़ाया था लेकिन सिंधिया फैक्टर के चलते उन्हें मन मसोसकर रह जाना पड़ा। कांग्रेस ने भी आधा दर्जन दावेदारों को दरकिनार कर युवा राकेश मावई को टिकट थमाया। यहां से कमलनाथ खेमे के दिनेश गुर्जर भी कतार में थे, जिन्होंने हाल में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर नंगे-भूखे की टिप्पणी करके भाजपाई खेमे को नया हथियार पकड़ा दिया।

चुनावी माहौल गर्म पर किसान नाराज
इधर, कांग्रेस सरकार की कर्जमाफी और शिवराज सिंह के वादों के बीच किसानों को निराशा ही हाथ लगी है। अमरसिंह कहते हैं, फसल की लागत बढ़ गई है और दाम नहीं मिल रहे हैं। हरीसिंह बोले- किसानों के वोट तो चाहिए लेकिन दर्द किसी ने नहीं जाना।

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