रूस से सुखोई, फ्रांस से राफेल… मगर भारत ने अमेरिका से फाइटर जेट क्यों नहीं खरीदा? जानिए असली वजह
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भारत की वायुसेना दुनिया की सबसे ताकतवर एयरफोर्स में गिनी जाती है। भारतीय वायुसेना के पास रूस के Sukhoi Su-30MKI और फ्रांस के अत्याधुनिक Dassault Rafale जैसे लड़ाकू विमान हैं। लेकिन एक सवाल अक्सर उठता है कि भारत ने अब तक अमेरिका से कोई प्रमुख फाइटर जेट क्यों नहीं खरीदा।
इसके पीछे कई रणनीतिक और राजनीतिक कारण बताए जाते हैं।
1️⃣ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की शर्तें
भारत जब भी रक्षा सौदा करता है तो वह टेक्नोलॉजी ट्रांसफर चाहता है ताकि देश में ही निर्माण और मेंटेनेंस हो सके। रूस और फ्रांस ने इसमें अपेक्षाकृत ज्यादा लचीलापन दिखाया, जबकि अमेरिका अक्सर अपनी सैन्य तकनीक साझा करने में सख्त शर्तें रखता है।
2️⃣ रणनीतिक स्वतंत्रता (Strategic Autonomy)
भारत लंबे समय से अपनी विदेश और रक्षा नीति में स्वतंत्रता बनाए रखना चाहता है। अमेरिका से बड़े रक्षा सौदे होने पर कई बार राजनीतिक शर्तें जुड़ सकती हैं, जिससे भारत सावधानी बरतता रहा है।
3️⃣ रूस के साथ पुराना रक्षा सहयोग
भारत और रूस का रक्षा सहयोग दशकों पुराना है। भारत की एयरफोर्स का बड़ा हिस्सा रूसी तकनीक पर आधारित है, इसलिए Sukhoi Su-30MKI जैसे विमानों को बनाए रखना और अपग्रेड करना आसान पड़ता है।
4️⃣ अमेरिकी प्रतिबंधों का डर
अतीत में अमेरिका ने कई देशों पर प्रतिबंध लगाए हैं। भारत नहीं चाहता कि किसी राजनीतिक परिस्थिति में उसके रक्षा उपकरणों की सप्लाई प्रभावित हो जाए।
5️⃣ फिर भी बदल रही है स्थिति
हाल के वर्षों में भारत और अमेरिका के रक्षा संबंध काफी मजबूत हुए हैं। भारत ने अमेरिका से Boeing P-8I Poseidon, Boeing AH-64 Apache और Boeing CH-47 Chinook जैसे कई सैन्य प्लेटफॉर्म खरीदे हैं।
👉 यानी भारत ने अमेरिकी हथियार खरीदे जरूर हैं, लेकिन फाइटर जेट के मामले में अब तक रूस और फ्रांस को प्राथमिकता दी गई है।

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