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देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी CBI के डायरेक्टर की सैलेरी कितनी होती है? जानिए


सीबीआई डायरेक्टर की नियुक्ति एक कमिटी करती है. कमिटी में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस या उनके द्वारा सिफारिश किया गया कोई जज शामिल होते हैं

भारत में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) हमेशा ही चर्चा में रहती है. सीबीआई देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी है. ये एजेंसी देशभर में होने वाले अपराधों जैसे हत्या, घोटालों और भ्रष्टाचार की भारत सरकार की तरफ से जांच करती है. लेकिन क्या आपको पता है कि देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी के डायरेक्टर की सैलेरी कितनी होती है. आपकी जानकारी के लिए बता दें, सीबीआई डायरेक्टर की सैलेरी हाईकोर्ट के एक जज की तनख्वाह के बराबर ही होती है.


सीबीआई डायरेक्टर की फिक्स बेसिक सैलेरी 80 हजार रुपये प्रति माह होती है. इसके अलावा बेसिक सैलेरी पर कई तरह के अलाउंस मिलते हैं. डियरनेस अलाउंस बेसिक सैलेरी का 120 फीसदी होता है. स्पेशल इंसेटिव अलाउंस 15 फीसदी मिलता है. इसके अलावा डीए भी जोड़ा जाता है. जिसके बाद सीबीआई डायरेक्टर की सैलेरी 1.60 लाख से 2.20 लाख रुपये प्रति माह तक हो जाती है. वहीं हाईकोर्ट के जज की सैलेरी 2.25 लाख प्रति माह के करीब होती है.


हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की बात करें, तो अलाउंस जोड़कर उनकी सैलेरी करीब 2.50 लाख प्रति माह होती है. सुप्रीम कोर्ट के जज की भी इतनी ही सैलेरी होती है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की सैलेरी करीब 2.80 लाख प्रति माह होती है.


सबसे बड़ी जांच एजेंसी की खासियतें
सीबीआई डायरेक्टर की नियुक्ति एक कमिटी करती है. कमिटी में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस या उनके द्वारा सिफारिश किया गया कोई जज शामिल होते हैं. साल 1977 से पहले तक सरकार अपनी मर्जी से सीबीआई डायरेक्टर को हटा सकती थी. लेकिन विनीत नारायण केस के बाद अब ऐसा संभव नहीं है. सीबीआई डायरेक्टर का कार्यकाल कम से कम दो साल का होता है. ताकि कोई भी डायरेक्टर बिना दबाव के स्वतंत्र रूप से काम कर सके.


सीबीआई को किसी भी केस की जांच करने के लिए पहले केंद्र सरकार से अनुमति लेनी होती है. अगर कोई राज्य सरकार किसी आपराधिक मामले की जांच का सीबीआई से आग्रह करती है तो भी केंद्र की अनुमति आवश्यक होती है. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट भी सीबीआई को किसी केस की जांच का आदेश दे सकते हैं.

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