सब्जी और फल हुए पुराने… अब तो दवाइयों के पौधे लगाकर अच्छा कमाने का है मौका! ये रहा पूरा प्लान


आप औषधीय फसलों की खेती करना चाहते हैं तो आपको कमाई के भी कई ऑप्शन मिलेंगे. इसके अलावा खास बात ये है कि इन फसलों को ज्यादा पानी या खास तरह की मिट्टी की आवश्यकता नहीं है

सब्जी और फल हुए पुराने... अब तो दवाइयों के पौधे लगाकर अच्छा कमाने का है मौका! ये रहा पूरा प्लान
यह औषधियां करीब 8500 तरीके की होती हैं. इन औषधियों को तीन कैटेगरी में बांटा जाता है.

अब किसान पारंपरिक फसलों को छोड़कर अलग अलग तरीके की खेती कर रहे हैं, इसमें स्ट्रॉबेरी से लेकर चिया सीड्स तक शामिल है. ऐसे में अब किसान औषधीय फसलों की भी खेती कर रहे हैं, जिससे उन्हें अच्छा फायदा हो रहा है. ऐसे में आप औषधीय फसलों की खेती करना चाहते हैं तो आपको कमाई के भी कई ऑप्शन मिलेंगे. इसके अलावा खास बात ये है कि इन फसलों को ज्यादा पानी या खास तरह की मिट्टी की आवश्यकता नहीं है. ऐसे में कम संसाधनों के साथ भी इनकी खेती कर सकती हैं, जो बाजार में अच्छे दाम में बिक रही है.

यह औषधियां करीब 8500 तरीके की होती हैं. इन औषधियों को तीन कैटेगरी में बांटा जाता है. इनमें एक कैटेगरी उन फसलों की है, जो सीधे काम में ली जाती है, जैसे तुलसी. इसके अलावा एक खेती होती है, जिनका इस्तेमाल आयुर्वेदिक दवाइयों में किया जाता है और तीसरी तरह की फसलें फार्मिस्ट कंपनियों के लिए काम की होती है. बता दें कि सभी फसलें अपने अपने क्षेत्र की जलवायु के हिसाब से होती है और उस हिसाब से ही आपको खेती करनी चाहिए.

कहां कौनसी खेती कर सकते हैं.

वैसे हर खेती आपके क्षेत्र की जलवायु पर निर्भर करती है. राजस्थान और गुजरात में औषधीय फसलों की खेती ज्यादा होता है और जहां ज्यादा उपजाऊ जमीन नहीं होती है. वहीं, कई तरह के औषधीय पौधों की खेती की जा सकती है. अभी इनकी काफी मांग बढ़ रही हैं. वहीं, उत्तरप्रदेश, बिहार, बंगाल के किसान सिंचाई की व्यवस्था अच्छी होने की वजह से आप कालमेघ की खेती कर सकते हैं. इसके फूल से लेकर पत्तियां और तने सबी अच्छे दाम में बिकते हैं. इसके पांचों अंग अच्छे दाम में बिकते हैं.

किस की खेती कर सकते हैं?

इसमें आप अश्वगंधी, गिलोय, भृंगराज, सतावर, पुदीना, मोगरा, तुलसी, घृतकुमारी, ब्राह्मी, शंखपुष्पी और गूलर आदि की खेती कर सकते हैं. बता दें कि आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत दिए गए आर्थिक पैकेज में औषधीय यानी हर्बल खेती को प्रोत्साहन देने के लिए 4000 करोड़ रुपये दिए गए हैं. किसानों की आय दोगुनी करने में कारगर है.

कितने तरह की होती है खेती?

औषधीय पौधों की खेती दो तरीकों से की जा सकती है. इसमें कुछ ऐसे होते हैं, जिनके फूल और पत्तियों का इस्तेमाल दवाइयों के रूप में किया जाता है, जिसमें आंवला, नीम और चंदन आदि महत्वपूर्ण है और यह पौधे लंबी अवधि में वृक्ष की शक्ल लेते हैं. इसकी लकड़ी, पत्तियां आदि काम आती हैं. हालांकि, इससे लम्बे समय बाद मुनाफा मिलना शुरू होता है.

कम समय में ज्यादा मुनाफा देने वाली खेती

ऊपर बताई गई खेती में आपको लंबे वक्त बाद कमाई होना शुरू होती है. वहीं, ईसबगोल, तुलसी, एलोविरा, हल्दी और अदरक की खेती से कम समय में ही इनकम शुरू हो जाती हा. इन सभी का इस्तेमाल आयुर्वेदिक दवाएं बनाने में किया जाता है.

अच्छी होती है इनकम

बता दें कि इन औषधियों की काफी मांग बढ़ रही है और खास बात ये है कि इनमें कम निवेश के अच्छी खेती हो सकती है. साथ ही यह बाजार में भी अच्छी कीमत में बिकते हैं. इसलिए अगर आप सही तकनीक से इसकी खेती करते हैं तो आप आसानी से अच्छे पैसे कमा सकते हैं.

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