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MP: IAS लोकेश जांगिड़ ने फिर उठाया सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल, कहा- सिविल सर्विस बोर्ड ने 1 साल में हर चौथे दिन किए हैं ट्रांसफर

MP: IAS लोकेश जांगिड़ ने फिर उठाया सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल, कहा- सिविल सर्विस बोर्ड ने 1 साल में हर चौथे दिन किए हैं ट्रांसफर


जांगिड़ के इतने कम समय में 8 बार ट्रांसफर हो चुका है. उनकी छवि हरियाणा कैडर के आईइएस अफसर अशोक खेमका जैसी बनती जा रही है

MP: IAS लोकेश जांगिड़ ने फिर उठाया सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल, कहा- सिविल सर्विस बोर्ड ने 1 साल में हर चौथे दिन किए हैं ट्रांसफर
IAS लोकेश जांगिड़ (फाइल फोटो)

मध्य प्रदेश (madhya pradesh) राज्य शिक्षा केंद्र में अपर संचालक और IAS अफसर लोकेश कुमार जांगिड़ (IAS Lokesh Jangid) पिछले दिनों तब सुर्खियों में आए थे. जब उन्होंने सरकार और आईइएस लॉबी पर कई सवाल उठाए थे. अब एक बार फिर लोकेश कुमार ने राज्य सरकार की कार्य प्रणाली पर सवाल उठा दिए हैं. उन्होंने कहा है कि आईइएस अफसरों के ट्रांसफर करने के लिए बने सिविल सर्विस बोर्ड की हर चौथे दिन बैठक बुलाई गई. यानी हर चौथे दिन आईइएस अफसरों के ट्रांसफर किए गए. उन्होंने कहा कि बोर्ड की बैठकें प्रदेश में एक कार्यकाल की न्यूनतम अवधि 2 साल पूरी न कर पाने वाले अफसरों के तबादलों को मंजूरी देने के लिए हुईं हैं.

लोकेश कुमार 2014 बैच के युवा आईइएस अफसर हैं. उनकी फील्ड पोस्टिंग के अभी साढ़े 4 साल हुए हैं, लेकिन इतने कम समय में उनका 8 बार ट्रांसफर हो चुका है. यानि देंखे तो लगभग हर 6 महीनें में हटाया गया है.

IAS अफसर अशोक खेमका जैसी छवि बनती जा रही है जांगिड़ की

जांगिड़ के इतने कम समय में 8 बार ट्रांसफर हो चुका है. उनकी छवि हरियाणा कैडर के आईइएस अफसर अशोक खेमका जैसी बनती जा रही है. अशोक खेमका के 30 साल की नौकरी में 53 तबादले हुए थे. यानी लगभग हर 7 महीने में तबादले हुआ था. बता दें कि जांगिड़ को मई में राज्य शिक्षा केंद्र के अपर संचालक से बड़वानी अपर कलेक्टर बनाया गया था, लेकिन एक महीने पहले उन्हें वापस राज्य शिक्षा केंद्र भेज दिया गया.

2 साल से पहले नहीं हटाया जा सकता आईएएस ऑफिसर को

मध्यप्रदेश में आईइएस अफसरों के ट्रांसफर करने के लिए सिविल सर्विस बोर्ड चार साल पहले गठित किया गया था. इसमें मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव और एक सीनियर अपर मुख्य सचिव सदस्य होते हैं. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2017 में एक आदेश में कहा था कि सरकार किसी भी आईइएस अफसर को 2 साल से पहले नहीं हटा सकती है. यदि किसी आईइएस का 2 साल से पहले तबादला किया जा रहा है तो उसके लिए कारण बताना होगा.

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