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महाकालेश्वर मंदिर में मिली 2100 साल पुरानी शिव त्रिशूल के चिन्ह वाली दीवार, राजा विक्रमादित्य के शासन में हुआ था निर्माण

महाकालेश्वर मंदिर में मिली 2100 साल पुरानी शिव त्रिशूल के चिन्ह वाली दीवार, राजा विक्रमादित्य के शासन में हुआ था निर्माण

 

उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर के आसपास नवनिर्माण के लिए चल रही खुदाई के दौरान 11 सौ साल पुरानी खंडित मूर्तियां भी मिली है

महाकालेश्वर मंदिर में मिली 2100 साल पुरानी शिव त्रिशूल के चिन्ह वाली दीवार, राजा विक्रमादित्य के शासन में हुआ था निर्माण
पुरातत्व विभाग की टीम ने खुदाई में मिले अवशेषों की जांच की.

उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर(Mahakaleshwar Temple) के आसपास नवनिर्माण के लिए चल रही खुदाई के दौरान कुछ ऐसे अवशेष मिले हैं कि लोग अपनी आंखों पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं. दरअसल खुदाई के दौरान यहां कुछ अवशेष मिले, जिन्हें देखकर स्थानीय इंजीनियर को कुछ शक हुआ कि यह ऐतिहासिक हो सकते हैं. जांच के बाद दावा किया जा रहा है कि ये करीब 11 सौ साल पुराने हैं.

जिसके चलते उन्होंने यहां पर महाकाल मंदिर के प्रशासन को सूचना दे दी. मंदिर प्रशासन की ओर से विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग के प्रोफेसर रमन सोलंकी को सूचित किया गया, जिन्होंने आकर अवशेष देखे. प्रोफेसर सोलंकी के कहने पर कलेक्टर को सूचित किया गया और उसके बाद भोपाल से पुरातत्व विभाग की टीम को यहां पर जांच करने के लिए बुलाया गया. जांच में जो कुछ सामने आया वह अपने आप में चौंकाने वाला था. दावा किया जा रहा है कि खुदाई में मिले अवशेष 1100 साल पुराने हैं. इन अवशेषों में खंडित मूर्तियां थीं.

खंडित सिर वाली मूर्तियां मिली

इन खंडित मूर्तियों में खास बात यह है कि सभी मूर्तियों के सिर खंडित किए गए हैं. कहा जा रहा है कि सिर खंडित होने का मतलब है कि इन मूर्तियों को जानबूझकर खंडित किया गया, जोकि पुराने मुगल शासकों और विदेशी आक्रांताओं की एक पहचान थी. जब पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने इन अवशेषों को देखा और जांच की तो पता चला कि यह करीब 11 सौ साल पुराने हैं. उस वक्त परमार वंश का शासन हुआ करता था. इतिहास में यह जानकारी दर्ज है कि इल्तुतमिश नाम के एक शासक ने महाकाल मंदिर पर आक्रमण करके इसे 12वीं शताब्दी में छिन्न-भिन्न किया था, इसीलिए ऐसा माना जा सकता है कि उसी दौरान इस मंदिर को भी खंडित किया गया.

मिली 2100 साल पुरानी दीवार

इसके अलावा इंजीनियर्स को मंदिर की दक्षिण दिशा में एक दीवार दिखी. जिसे देखकर अंदाजा लगाना मुश्किल था यह कितनी पुरानी है. पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह दीवार करीब 2100 साल पुरानी है, यानी राजा विक्रमादित्य के शासन के समय इस दीवार का निर्माण किया गया था. इस दीवार पर बेमिसाल स्थापत्य कला के चिन्ह मिलते हैं. यह कहा जाता है कि कण-कण में भगवान है और महाकाल की नगरी में कण-कण में शिव है.

भगवान शिव के त्रिशूल के चिन्ह मिले

भगवान महाकाल शताब्दियों पहले भी काफी पूजे जाते थे, इसका उदाहरण स्थापत्य कला में मिला, जब दीवार के खंभों पर भगवान शिव के त्रिशूल के चिन्ह मिले. महाकाल मंदिर के प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने टीवी 9 से खास बातचीत की उन्होंने कहा कि यह इतिहास की सबसे बड़ी खोज है क्योंकि अभी तक 21 सौ पुराने अवशेष ना कभी देखे थे और ना सुने थे. दक्षिण दिशा में सीता माता के मंदिर के पास इस तरह के अवशेष मिल रहे हैं और आगे उम्मीद है कि इतिहास के और पन्ने खुलेंगे

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