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सात साल में करोड़ों के फर्जीवाड़े की जांच पूरी नहीं कर सकी इओडब्ल्यू

सात साल में करोड़ों के फर्जीवाड़े की जांच पूरी नहीं कर सकी इओडब्ल्यू

- मामला मुरैना जिले के दर्जनों कॉलेज में छात्रवृत्ति के नाम पर गड़बड़ी का

मुरैना. जिले के दर्जनों शासकीय व अशासकीय कॉलेजों में वर्ष २००७-०८ से वर्ष २०१२-१३ तक अनुसूचित जाति, जन जाति व अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों को राज्य शासन के द्वारा प्रदान की जाने वाली छात्रवृत्ति के नाम पर कॉलेज संचालकों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर छात्रों के नाम पर करोड़ों की राशि का आहरण कर ली गई। इसकी शिकायत आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ग्वालियर पुलिस अधीक्षक को वर्ष २०१३ में की गई थी। जिसका अपराध क्रमांक १०/१३ है। इस जांच को सात साल हो गए लेकिन अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है। इस मामले को लेकर जांच एजेंसी पर भी सवाल उठने लगे हैं।
जांच एजेंसियों पर लोग भरोषा करके शिकायत इसलिए करते हैं कि त्वरित न्याय मिल जाएगा और बताया गया है कि जांच एजेंसियों को जांच के लिए एक निश्चित समय सीमा भी रहती है लेकिन आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ में कॉलेज में छात्रवृत्ति के नाम पर हुए बड़े फर्जीवाड़े की शिकायत को सात साल हो गए लेकिन अभी तक जांच पूरी नहीं हो सकी है। जबकि इओडब्ल्यू के पुलिस अधीक्षक ने जिन अधिकारियों को जांच का जिम्मा सौंपा था, वह संबंधित कॉलेजों से सात साल पूर्व ही रिकॉर्ड ले चुके हैं परंतु जांच के नाम पर मामले को अभी तक लटकाया गया है। मामले को लटकाने के पीछे क्या हो सकता है, लोगों में तरह तरह की चर्चाएं हैं।
सूचना अधिकार में जानकारी मांगने पर हुआ खुलासा...........
ईओडब्ल्यू कार्यालय ग्वालियर से सूचना के अधिकार के तहत कॉलेज में छात्रवृत्ति के नाम पर हुए फर्जीवाड़े की जांच की स्थिति क्या रही, इसकी जानकारी नियमानुसार दी जाए। इसके एवज में लोक सूचना अधिकारी (डीएसपी) लोकेन्द्र ङ्क्षसह तोमर ने पत्र भेजकर बताया कि जांच प्रक्रिया में इसलिए जानकारी देना उचित नहीं हैं। लेकिन जब उनसे फोन पर पूछा गया कि जांच की कोई समय सीमा होती है क्या, तो उन्होंने कहा कि मुझे जो दायित्व मिला, उसका निर्वहन कर रहा हूं। इसकी जानकारी मैं नहीं दे सकता।
ईओडब्ल्यू ने कॉलेजों से ये मांगी जानकारी....
- वर्ष २००७ से २०१३ के दौरान कक्षाबार, वर्ष बार छात्रों की संख्या सहित प्राप्त की गई छात्रवृत्ति की राशि।
- छात्रों के द्वारा कॉलेजों को दिए गए आवेदन पत्रों की प्रतियां।
- छात्रों के आवेदन पत्रों को अग्रेषित करने वाले प्राचार्य का नाम, पद, नियुक्ति अवधि एवं उक्त पद पर नियुक्ति से संबंधित बैध आदेश की प्रति।
- महाविद्यालय ने छात्रवृत्ति किस बैंक खाते में प्राप्त की गई, उक्त खाते का क्रमांक, प्रकार तथा बैंक खातों का संधारण करने वाले संबंधित कर्मचारी का पदनाम अवधि सहित।
- महाविद्यालयों में वर्ष २००७ से २०१३ तक की अवधि में पदस्थ रहे प्राचार्य एवं संचालकों के नाम, पता, मोबाइल नंबर, शैक्षणिक योग्यता की जानकारी आदि।
कथन......
- मुरैना के कॉलेजों में छात्रवृत्ति में हुए फर्जीवाड़े के मामले में अभी तक जांच कहां तक पहुंची हैं, यह तो देखना पड़ेगा। क्योंकि ४००-५०० प्रकरण चल रहे हैं, ऐसे ध्यान नहीं रहता, कभी आफिस आइये फिर देखते हैं। किसी भी मामले में जांच की समय सीमा निर्धारित नहीं रहती।
अमित सिंह, पुलिस अधीक्षक, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ, ग्वालियर
- इओडब्ल्यू ने हमसे जो रिकॉर्ड मांगा था, हम सात साल पहले पूरा रिकॉर्ड दे चुके हैं, अब उन्होंने क्या किया, यह तो वही जानें।
राकेश गुप्ता, संचालक, पं. दीनदयाल कॉलेज, पोरसा
- मुरैना के कॉलेजों में छात्रवृत्ति में हुए फर्जीवाड़े की जांच में क्या हुआ, यह तो ग्वालियर एसपी को पता होगा, मुझे अभी आए हुए दो तीन हुए हैं। फिर भी मैं मामले को दिखवा लेता हूं।
अजय शर्मा, महानिदेशक, ईओडब्ल्यू, भोपाल

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