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Showing posts from November, 2020

नंबर1 स्मार्ट सिटी से इंदौर दो कदम दूर:स्मार्ट सिटी के 221 में से 171 प्रोजेक्ट पूरे, 641 करोड़ फंड, खर्चे 700 करोड़

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  इंदौर स्मार्ट सिटी का रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट। इसके फिलहाल दो फेज ही पूरे हुए हैं। ()  स्मार्ट सिटी की दौड़ में शामिल देश के 100 शहरों में इंदौर एक बार फिर नं. 3 पर पहुंच गया है। इसका बड़ा कारण यह है कि इंदौर के 221 प्रोजेक्ट में से 171 पूरे हो चुके हैं। इन पर स्मार्ट सिटी 700 करोड़ खर्च कर चुकी है, जबकि फंड 641 करोड़ का ही मिला था। इंदौर स्मार्ट सिटी द्वारा 5432 करोड़ के 221 प्रोजेक्ट लिए गए हैं। इसमें 276 वर्ग किमी के पेन सिटी एरिया के साथ तीन वर्ग किमी के एबीडी एरिया को लिया गया है। स्मार्ट सिटी के लिए 500 करोड़ का फंड केंद्र सरकार और 500 करोड़ का फंड राज्य सरकार द्वारा दिया जाना है। इनमें इंदौर स्मार्ट सिटी को अब तक 641 करोड़ रुपए मिल चुके हैं। बाकी राशि स्मार्ट सिटी कंपनी को इन्हीं प्रोजेक्ट्स से प्रॉफिट निकालकर जुटानी है। सरकार से लंबे समय से पैसों की मांग की जा रही है। लैंड मॉनिटाइजेशन का प्रोजेक्ट एमओजी लाइंस का है। इसी से स्मार्ट सिटी को आमदनी होगी। समय पर फंड मिलता रहे तो स्मार्ट सिटी में भी नंबर 1 होंगे तीसरे नंबर से ऊपर क्यों नहीं जा पा रहे? दूसरे शहरों की तरह हमें भी समय पर फंड मिल

दीपपर्व पर रियल एस्टेट से शुभ समाचार:नवंबर में भी हर दिन 500 सौदे 600 करोड़ की संपत्ति बिकी

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  इंदौर  दिवाली की रात यह तस्वीर राजकुमार ब्रिज क्षेत्र की। फोटो | संदीप जैन आयकर नियम में बदलाव से तैयार मकान और फ्लैट में होंगे अधिक सौदे रियल एस्टेट सेक्टर कोरोना से उबरकर नई तेजी की ओर जा रहा है। अक्टूबर में इसके पहली बार संकेत मिले थे और पूरे माह में 1100 करोड़ की 10 हजार से अधिक संपत्तियां पूरे जिले में बिकी थीं। अब नवंबर में भी हर दिन 500 से अधिक सौदे हो रहे हैं। अभी तक जिले में 600 करोड़ से ज्यादा की 5900 से ज्यादा संपत्तियां बिक गई हैं। रोज हो रहे सौदों से इस बार भी पंजीयन विभाग उम्मीद कर रहा है कि सौदों की संख्या करीब 11 हजार तक पहुंच सकती है। शहर में जमकर हुई आतिशबाजी। इसकी बड़ी वजह केंद्र द्वारा आयकर नियमों में दी गई छूट है। केंद्र ने अब दो करोड़ तक की आवासीय संपत्ति, जिसकी पहली बार रजिस्ट्री हो रही है और ग्राहक सीधे बिल्डर से इसे खरीद रहा है, तो वह यह सौदा अब गाइडलाइन कीमत से 20 फीसदी तक में ले सकता है। अंतर की यह राशि अब उसकी आय में जुड़कर आयकर के दायरे में नहीं आएगी।

बॉलीवुड में एक और खुदकुशी:सुशांत के साथ 'काई पो छे' में काम कर चुके आसिफ बसरा ने की आत्महत्या, रिपोर्ट्स में डिप्रेशन में होने का दावा

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आसीफ बसरा ने 'पाताल लोक' वेब सीरीज में न्यूज एंकर का किरदार निभाया था। वे हाल ही में 'होस्टेजेस' के दूसरे सीजन में नजर आए थे। धर्मशाला के मैक्लोडगंज में एक कैफे के पास लटका मिला आसिफ का शव पुलिस ने जांच शुरू की, बसरा की लिव-इन पार्टनर को हिरासत में लिया गया सुशांत सिंह राजपूत के बाद उनके साथ 'काई पो छे' जैसी फिल्मों में काम कर चुके आसिफ बसरा ने खुदकुशी कर ली है। रिपोर्ट्स की मानें तो 53 साल के बसरा ने हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला के मैक्लोडगंज में एक कैफे के पास आत्महत्या की। बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने पालतू कुत्ते की रस्सी से फांसी लगाकर जान दे दी। हालांकि अभी आत्महत्या के कारणों का पता नहीं चला है। हालांकि, कहा जा रहा है कि वे डिप्रेशन से जूझ रहे थे। इन 10 सेलेब्स की आत्महत्या आज भी अनसुलझी पहेली 5 साल से मैक्लोडगंज में रह रहे थे आसिफ पुलिस ने आसिफ का शव कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है। एसपी विक्रांत रंजन ने अपने बयान में कहा है कि वे हर एंगल से जांच कर रहे हैं। पुलिस के मुताबिक, कथित सुसाइड से पहले वे पास इलाके में ही अपने कुत्ते के साथ टहलकर लौ

कंगना ने भाई की शादी में 6 करोड़ खर्च किए, 45 लाख की ज्वेलरी और 18 लाख की ड्रेस पहनी

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मुंबई एक्ट्रेस कंगना रनोट के भाई अक्षत की शादी रितु सागवान के साथ राजसी ठाटबाट के साथ उदयपुर के द लीला पैलेस में गुरुवार को हुई। . एक्ट्रेस कंगना रनोट के भाई अक्षत की शादी रितु सागवान के साथ राजसी ठाटबाट के साथ उदयपुर के द लीला पैलेस में गुरुवार को हुई। कंगना के करीबी सूत्रों के अनुसार, एक्ट्रेस ने भाई की शादी को खास और यादगार बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने इस शादी में करीब 6 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। तस्वीरों में भी शादी की भव्यता साफ नजर आ रही है। दैनिक भास्कर को कंगना के करीबियों ने बताया कि एक्ट्रेस ने भाई की शादी में गुजराती बंधनी लहंगा पहना था। इसकी कीमत करीब 18 लाख रुपए थी। उनका ये लहंगा पूरे 14 महीनों में बनकर तैयार हुआ है और इसे कंगना के लिए अनुराधा वकील ने तैयार किया है। लहंगे के साथ एक्ट्रेस ने 45 लाख रु. की ज्वेलरी पहनी थी, जिसे मशहूर डिजाइनर सब्यसाची ने बेहद कम समय में तैयार किया है। कंगना की डिमांड पर उदयपुर के होटल लीला पैलेस को रजवाड़ी थीम पर सजाया गया था। कंगना की यह खूबसूरत ड्रेस परपल, ग्रीन और ब्लू कपड़े से मिलकर बनी थी। सिर्फ 45 गेस्ट हुए शामिल, बने थे राजस

कोरोना देश में:एक्टिव केस में लगातार 42वें दिन गिरावट, अब 55% से ज्यादा मरीज सिर्फ 5 राज्यों में

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नई दिल्ली देश में कोरोना के इलाज करा रहे मरीजों की संख्या में 3 अक्टूबर से लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। 17 सितंबर को ये 10.17 लाख की पीक पर थे, जो अब घटकर 4.84 लाख बचे हैं। अब सिर्फ पांच राज्यों महाराष्ट्र, केरल, दिल्ली, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक में ही 55% एक्टिव केस हैं। देश में बुधवार को 44 हजार 546 केस आए। इनमें से 49 हजार 266 मरीज ठीक हो गए, जबकि 544 की मौत हो गई। अब तक कुल 87.28 लाख लोग संक्रमित हो चुके हैं। इनमें से 81.13 लाख ठीक हो गए और 1.28 लाख की मौत हो गई। एम्स डायरेक्टर गुलेरिया बोले- जिन्हें इंफेक्शन, उन्हें वैक्सीन पहले मिलेगी इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया का कहना है कि कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के बाद हम ऐसी स्थिति में पहुंच जाएंगे, जब हर्ड इम्युनिटी आ जाएगी। तब वैक्सीन की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। एक इंटरव्यू में उनसे पूछा गया कि अगर वैक्सीन 2021 के आखिर तक या 2022 के शुरू में आती है तो क्या तब तक लोगों में इम्युनिटी नहीं आ जाएगी? लोग इस वायरस के संक्रमण को सर्दी, खांसी-जुकाम जैसी मामूली बीमारी समझने लगें, तो इसका उनकी सेह

12 गांवाें की एक सी सूरत:हर घर सड़क से 45 फीट दूर, अपने प्लाॅट की जमीन छाेड़कर बनाए मकान

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  होशंगाबाद गांव में लाेग अपने घराें पर ही सारा इंतजाम रखते है। इसलिए दूरी पर घर बनाए गए हैं। हाेशंगाबाद जिले में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से विस्थापित इन गांवों जैसा हाे शहरों का भी रूप 11 किमी के आदिवासी काॅरिडाेर में सरकारी जमीन पर ग्रामीणों का एक फीट भी कब्जा नहीं शहर हाे या गांव, अतिक्रमण ने सभी की सूरत बिगाड़ दी है। ऐसे दाैर में हाेशंगाबाद जिले में 11 किमी में आदिवासी काॅरिडाेर के 12 गांव आंखों को सुकून देते हैं। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से विस्थापित हुए इन वनग्रामाें में हर घर सड़क से 45 फीट दूर है। अपने प्लाॅट के आगे के हिस्से की जमीन छाेड़कर लाेगाें ने सड़क से इतनी दूर मकान बनाए हैं। काकड़ी गांव काे ही लीजिए। यहां 34 घर हैं। किसी भी घर के आगे या पीछे सरकारी जमीन पर कब्जा नहीं है। 7 साल पहले विस्थापित हुए काकड़ी के आदिवासियाें की अच्छी साेच से यह सुंदरता आई है। 2013 में विस्थापित हुए इस गांव में 50 फीट के क्षेत्र में खुले आंगन और बगीचे हैं। घराें के पीछे शाैचालय है। घराें में कार्यक्रम की परंपरा, इसलिए छाेड़ते हैं जमीन ^आदिवासी समाज के लाेग घराें में ही सांस्कृतिक, पारिवारिक कार्यक्रम

भोपाल में आज के इवेंट्स:कनकश्री भट्ट द्वारा भक्ति संगीत की प्रस्तुति, वन विहार रहेगा बंद, शहर में कब-क्या होगा, यहां पढ़ें

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भोपाल आपके लिए जरूरी अपडेट्स... मौसम आसमान साफ रहेगा। अधिकतम तापमान 29 डिग्री, न्यूनतम 13 डिग्री वन विहार दिवाली के चलते वन विहार रहेगा बंद। पासपोर्ट सेवा केंद्र डीबी सिटी स्थित पासपोर्ट सेवा केंद्र खुला रहेगा। म्यूजिक/डांस 'रंग मध्यप्रदेश' के अंतर्गत कनकश्री भट्ट की भक्ति संगीत की प्रस्तुति, जनजातीय संग्रहालय, शाम 6:30 बजे। दिवाली पहाट की प्रात:कालीन सभा, पिपलानी गणेश मंदिर, समय सुबह 6:30 बजे। एग्जीबिशन आदिवासी पिथौरा चित्रकला प्रदर्शनी, हिंदी भवन, सुबह 11 बजे गीता बारिया की पेंटिंग एग्जीबिशन, जनजातीय संग्रहालय, दोपहर 12 बजे माह का प्रादर्श, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय, दोपहर 12 बजे हाट बाजार/मेला दीपोत्सव, गौहर महल, दोपहर 12 बजे दीपोत्सव, भोपाल हाट, दोपहर 2 बजे

हौसला:अक्षत में ऐसी प्रतिभा कि सिंड्रोम भी डाउन; 1300 दीयों पर बिखेरी कला की रोशनी, आत्मनिर्भरता की ओर कदम

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  इंदौर 19 साल के अक्षत डाउन सिंड्रोम से पीड़ित हैं। उन्होंने दिवाली पर दीये डेकोरेट किए हैं। प्रशिक्षण केंद्र में सीखा दीये सजाना, उसी को बनाया हुनर, रोज 50-60 दीये डेकोरेट कर लेते हैं अक्षत चार दीयों का एक पैकेट बनाया है, जिसकी कीमत 40 रुपए है डाउन सिंड्रोम से पीड़ित एक युवक ने एक प्रशिक्षण केंद्र में सीखी कला को अपनाते हुए दिवाली पर कलात्मक दीये तैयार किए हैं। अब तक वह करीब 1300 दीये सजाकर बेच भी चुका है। उनके सजाए दीये रिश्तेदार भी पसंद कर रहे हैं। यही नहीं अब ऑर्डर भी आना शुरू हो गए हैं। 19 साल के अक्षत डाउन सिंड्रोम से पीड़ित हैं। उनकी मम्मी आरती घोडगावकर ने बताया कि अक्षत ने नासिक में वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर में दीये बनाना सीखा था। लॉकडाउन की वजह से हम इस साल उसे नासिक नहीं ले जा पाए। यहां कोई क्लास भी ज्वॉइन नहीं की। खाली समय में वह ऊब महसूस कर रहा था। तब ये विचार आया कि क्यों ने दिवाली के दीये सजाए जाएं। चूंकि वह दीये डेकोरेट कर चुका था, एक प्रदर्शनी में उसके दीये काफी पसंद किए गए थे, इसलिए दीये सजाना शुरू किया। सौ दीये तैयार करने से की थी शुरुआत, चार दीयों के पैकेट की कीमत 40 रुप

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