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मप्र पॉलिटिक्स / तीन दिन बाद भी मंत्रियों को नहीं मिले विभाग, शिवराज-सिंधिया में बड़े विभागों पर फंसा पेंच


  • इन पर अटका : नगरीय विकास, पीडब्ल्यूडी, राजस्व, वाणिज्यिक कर, आबकारी, पीएचई, परिवहन, महिला एवं बाल विकास, खनिज

भोपाल. मंत्रिमंडल विस्तार के तीन दिन में भी 28 मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा नहीं हो सका। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच अहम विभागों को लेकर पेंच फंस गया है। सिंधिया अपने लोगों के लिए कुछ बड़े विभाग चाहते हैं, जिस पर केंद्रीय संगठन से चर्चा के बाद मुख्यमंत्री अंतिम निर्णय लेंगे। इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री को शनिवार को दिल्ली जाना था। वहां उनकी सिंधिया समेत केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात होनी है। लेकिन लेकिन ऐन वक्त पर कार्यक्रम टल गया।

वे अब रविवार की सुबह नौ बजे दिल्ली जा रहे हैं। दिल्ली में मुख्यमंत्री की सिंधिया से मुलाकात संभावित है। यहां बड़े विभागों पर सहमति बन सकती है। कांग्रेस की कमलनाथ सरकार में सिंधिया समर्थकों के पास स्वास्थ्य, राजस्व, परिवहन, महिला एवं बाल विकास, स्कूल शिक्षा, श्रम विभाग थे। इनमें से काफी विभाग सिंधिया अपने पास ही रखना चाहते हैं।

मुख्यमंत्री चौहान की कल केंद्रीय नेतृत्व के साथ राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष से चर्चा होगी। इसी दौरान सिंधिया से भी बात होगी। इसके बाद विभागों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
शनिवार को मुख्यमंत्री ने प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और संगठन महामंत्री सुहास भगत के साथ विभागों को लेकर मुख्यमंत्री की चर्चा हो गई है। दिल्ली में अब सभी स्थितियों पर बात होगी। भाजपा में बड़ी दिक्कत वित्त विभाग को लेकर भी है, क्योंकि दस साल तक वित्तमंत्री रहे जयंत मलैया 2018 में चुनाव हार गए।

किसे-क्या जिम्मा दें, इस पर भाजपा के भीतर ही उलझन

भाजपा के भीतर भी विभागों को लेकर उलझन बढ़ गई है। नरोत्तम के पास अभी गृह और स्वास्थ्य है। एक विभाग कम होता है तो क्या होगा? चर्चा है कि मुख्यमंत्री अपने पास जनसंपर्क विभाग रखना चाहते हैं, एेसा हुआ तो नरोत्तम को कौन सा विभाग मिलेगा। गोपाल भार्गव और विश्वास सारंग को क्या मिलेगा। भूपेंद्र सिंह पिछली सरकार में गृहमंत्री थे। उन्हें क्या दिया जाएगा। इन सवालों के जवाब उलझे हुए हैं।

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