भोपाल / माखनलाल पत्रकारिता यूनिवर्सिटी के प्रभारी कुलपति संजय द्विवेदी बने आईआईएमसी के महानिदेशक


  • माखनलाल पत्रकारिता यूनिवर्सिटी के प्रभारी कुलपति संजय द्विवेदी को आईआईएमसी का महानिदेशक नियुक्त किया गया है।माखनलाल पत्रकारिता यूनिवर्सिटी के प्रभारी कुलपति संजय द्विवेदी को आईआईएमसी का महानिदेशक नियुक्त किया गया है।

  • संजय द्विवेदी को अगले 3 साल के लिए आईआईएमसी का डायरेक्टर जनरल नियुक्त किया गया है
  • मध्य प्रदेश में शिवराज सरकार की वापसी के बाद उन्हें रजिस्ट्रार और बाद में कुलपति का अतिरिक्त प्रभार सौंपा था

भोपाल. माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय प्रभारी कुलपति और रजिस्ट्रार संजय द्विवेदी अब दिल्ली के भारतीय जनसंचार संस्थान के महानिदेशक होंगे। संजय द्विवेदी को आईआईएमसी का डायरेक्टर जनरल बनाने की अधिसूचना जारी कर दी गई है। उन्हें अगले 3 साल के लिए डीजी आईआईएमसी नियुक्त किया गया है। कार्मिक मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आदेश के मुताबिक कैबिनेट ने इस नियुक्ति को हरी झंडी दे दी है।

एमसीयू के प्रभारी कुलपति संजय द्विवेदी को तीन साल की अवधि के लिए सीधी भर्ती के आधार पर आईआईएमसी के महानिदेशक के रूप में नियुक्ति को मंजूरी दी गई है। आईआईएमसी के डीजी का पद बीते एक साल से खाली था, जिस पर अब प्रो. द्विवेदी पदभार संभालेंगे। प्रो. संजय द्विवेदी वर्तमान में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार हैं और उन्हें पूर्व कुलपति दीपक तिवारी के इस्तीफा देने के बाद विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति बनाया गया था।

जनसंचार विभाग के एचओडी रहे हैं प्रोफ़ेसर द्विवेदी
प्रोफ़ेसर संजय द्विवेदी लंबे समय से माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय में जनसंपर्क विभाग और बाद में पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष भी रहे हैं। वह मीडिया विमर्श पत्रिका के कार्यकारी संपादक भी हैं। इसके साथ ही 25 पुस्तकों का लेखन और संपादन भी कर चुके हैं। मध्य प्रदेश में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार बनने के बाद में द्विवेदी के मुश्किल भरे दिन शुरू हो गए थे।

2019 में जब पत्रकार दीपक तिवारी कुलपति बने तो संजय द्विवेदी को पहले कुलसचिव के पद से हटाया गया। इसके कुछ दिनों बाद उन्हें पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष पद से भी हटा दिया गया था। इसके बाद संजय द्विवेदी यूनिवर्सिटी में बतौर प्रोफेसर अपनी सेवाएं दे रहे थे। लेकिन सत्ता बदलते ही उन्हें भाजपा सरकार ने उन्हें विश्वविद्यालय में रजिस्ट्रार बनाया और कुलपति के पद का अतिरिक्त प्रभार भी सौंप दिया।

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