मध्य प्रदेश की सियासत / शिवराज तीसरे दिन दिल्ली से भोपाल लौटे; आज मंत्रिमंडल विस्तार टला, प्रदेश की राजनीति में कुछ बड़ा होने की अटकलें


  • मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान रविवार को केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात करने दिल्ली पहुंचे थे। इसके बाद अचानक नरोत्तम मिश्रा को भी दिल्ली बुलाया गया था। -फाइल फोटोमुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान रविवार को केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात करने दिल्ली पहुंचे थे। इसके बाद अचानक नरोत्तम मिश्रा को भी दिल्ली बुलाया गया था। -फाइल फोटो

  • शिवराज ने शाह, नड्डा, तोमर और सिंधिया से मुलाकात की, सोमवार शाम मोदी से भी मिले
  • सिंधिया का भोपाल दौरा रद्द हो गया है, वे मंगलवार सुबह भोपाल आने वाले थे
  • वरिष्ठ विधायक गोपाल भार्गव ने कहा- भाजपा भी कांग्रेस वाली गलती कर रही है


भोपाल. मध्य प्रदेश में शिवराज मंत्रिमंडल का 30 जून को होने वाला संभावित विस्तार टल गया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह तीन दिन दिल्ली में रहकर मंगलवार सुबह भोपाल लौट आए। बताया जा रहा है कि संगठन 13 वरिष्ठ विधायकों की जगह युवा चेहरों को मौका देना चाहता है, जबकि शिवराज इससे सहमत नहीं हैं। मंत्रिमंडल विस्तार टलने के बाद प्रदेश की राजनीति में कुछ बड़ा होने की अटकलें लगाई जा रही हैं। कल देवशयनी एकादशी है इसके बाद शुभ काम 5 महीने के लिए अटक जाएंगे। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि कोई रास्ता निकला तो कल मंत्रिमंडल विस्तार किया जा सकता है।

शिवराज के साथ दिल्ली से प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा और संगठन महामंत्री सुहास भगत भी लौट आए। स्टेट हैंगर से मुख्यमंत्री सीधे अपने निवास पहुंचे। बताया जा रहा है कि वे आज दिनभर मंत्रालय में आगे की रणनीति पर मंथन करेंगे।

शाह से दो बार मिले शिवराज

दिल्ली में बीते दो दिन में मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। वे गृह मंत्री अमित शाह से दो बार मिले। सोमवार शाम उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी चर्चा की।

अचानक बदल गया घटनाक्रम

सोमवार काे खबर आई थी कि संभावित मंत्रियों के नाम फाइनल हो गए हैं और 30 जून को शपथ ग्रहण हो जाएगा। इसके बाद शाम को सियासी घटनाक्रम एकदम बदल गया। अचानक प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को दिल्ली बुलाया गया। उनकी किन-किन नेताओं से मुलाकात हुई, इसका ब्योरा नहीं मिला। उधर, सिंधिया का भोपाल दौरा रद्द हो गया है। वे मंगलवार सुबह भोपाल आने वाले थे।

13 विधायक 3 बार मंत्री रहे, अब संगठन इन्हें मौका नहीं देना चाहता

संगठन ने अगर नए चेहरों को मौका दिया तो इस बार 13 वरिष्ठ विधायकों का मंत्री बनना मुश्किल होगा। इनमें गोपाल भार्गव, विजय शाह, सुरेंद्र पटवा, रामपाल सिंह, राजेंद्र शुक्ल, प्रेम सिंह पटेल, पारस जैन, नागेंद्र सिंह, करण सिंह वर्मा, जगदीश देवड़ा, गौरीशंकर बिसेन, अजय विश्नोई, भूपेंद्र सिंह का नाम है। ये पिछली तीन भाजपा सरकारों में मंत्री रहे हैं। इन अटकलों पर विधायक गोपाल भार्गव ने कहा कि भाजपा भी वही गलती कर रही है जो कांग्रेस ने की थी। पार्टी को वरिष्ठ नेताओं का सहयोग लेना चाहिए।

नरोत्तम और सिलावट को डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है

सूत्रों के मुताबिक, शिवराज की ओर से प्रस्तावित मंत्रिमंडल की सूची को भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने रिजेक्ट कर दिया है। इसके साथ नए नामों को लेकर कवायद तेज हो गई है। खबर ये भी है कि और जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट को उप मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है।

संगठन और सरकार में यह पेंच फंसे

  • सूत्रों की मानें तो प्रदेश संगठन शिवराज के पिछले कार्यकालों में मंत्री रहे वरिष्ठ नेताओं की जगह नए चेहरों को मौका देना चाहता है। मुख्यमंत्री चाहते हैं कि यह निर्णय बाद में लिया जाए। सिंधिया समर्थकों में से सभी बड़े नेताओं को मंत्री बनाया जाता है तो भाजपा के पास पद कम बचेंगे। संगठन चाहता है कि एक-दो लोगों को रोककर उन्हें उपचुनाव के बाद मंत्री बनाया जाए। 
  • कांग्रेस से भाजपा में आए सिंधिया समर्थक ओपीएस भदौरिया, राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव और रणवीर जाटव भी दावेदार हैं। इन्हीं में से एक-दो लोगों को कम करने पर बात हो रही है, क्योंकि एंदल सिंह कंसाना, बिसाहूलाल सिंह और हरदीप डंग को मंत्री बनाना पहले ही तय हो चुका है। बताया जा रहा है कि कुछ विभागों पर देर रात नड्‌डा ने सहमति दे दी।

मार्च में सियासी उलटफेर, भाजपा की सरकार के 100 दिन पूरे
राज्य में मार्च महीने में बड़ा सियासी उलटफेर हुआ। वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस का साथ छोड़कर भाजपा में आए। उनके समर्थन में 22 विधायकों ने भी विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ को 20 मार्च को पद से इस्तीफा देना पड़ा। 23 मार्च को शिवराज ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। अप्रैल में 5 मंत्रियों को शपथ दिलाकर मुख्यमंत्री ने मंत्रिमंडल का गठन किया। इन 5 में से 2 मंत्री सिंधिया खेमे से हैं।

29 मंत्री और बनाए जा सकते हैं
विधानसभा में सदस्यों की संख्या के हिसाब से राज्य में अधिकतम 35 मंत्री हो सकते हैं। इनमें मुख्यमंत्री भी शामिल हैं। इस तरह मुख्यमंत्री अधिकतम 29 और मंत्री बना सकते हैं।

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